Sunday, September 20, 2020

रैगर छात्रावास प्रबंध समिति की कार्यकारिणी का चुनाव सर्वसम्मति से होना चाहिए - लोकेश सोनवाल

 


दिल्ली समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l रैगर समाज की शिक्षा के मामले में जानी-पहचानी संस्था रैगर छात्रावास प्रबंध समिति के चुनाव का समय आगामी 27 नवंबर तय हो चुका है । ये चर्चा ज़ोरों से चल रही है कि पदाधिकारियों का चयन मतदान द्वारा किया जाए या सर्वसम्मति से । चुनाव का मतलब समिति के शीर्ष नेतृत्व के रूप में पदाधिकारियों का चयन करना l समाज द्वारा चुने जाने वाले पदाधिकारियों के बारे में यह देखना होगा कि उम्मीदवार शिक्षा और सामज के प्रति सकारत्मक सोच रखता हो, और समाज की छोटी-बड़ी हर समस्या और समाधान के लिए जागरूक,ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ हो l अगर समाज के अनुभवी लोग इन बातों को ध्यान में रखकर समझदारी से ऐसे उम्मीदवारों का चयन चाहे मतदान से या सर्वसम्मति से करते है तो वे दोनों ही प्रक्रिया समाजहित में होगी ।

समाज के कुछ प्रबुद्ध लोगो का मानना है कि मतदान द्वारा चुनाव प्रक्रिया से समाज पर समय और अर्थ दोनों का भार बढ़ता है । चुनाव द्वंद्व-युद्ध है, इससे समाज में मतभेद और मनभेद बढ़ते है जिससे समाज की एकता भंग होती है l सुलझे हुए समझदार सामाजिक कार्यकर्ता कभी भी समय और अर्थ का बोझ समाज पर नहीं डालना चाहते हैं और न ही समाज की एकता भंग करना चाहते हैं, इसलिए  मतदान से चुनाव के स्थान पर सर्वसम्मति से चयन को महत्व देते हैं ।

रैगर समाज के लोकेश सोनवाल (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक) ने रैगर छात्रावास प्रबंध समिति के चुनाव के विषय में अपने विचार लिखित में समाज के समुख रखे है जो निम्न प्रकार से है :-

रैगर समाज के सम्मानित वरिष्ठजनों, भाईयों और बहनों,

जैसा कि विदित है रैगर छात्रावास प्रबंध समिति ने आगामी 27 नवंबर को चुनाव करवाने का निर्णय लिया है । लोकतांत्रिक रूप से निर्णय स्वागत योग्य है । मैंने अपने जीवन के 50 साल समाज की सेवा में न्योछावर किये हैं, इन पचास सालों के अनुभवो के आधार पर मैं समाज से निम्नलिखित निवेदन करना चाहता हूँ।

1. पिछले दो चुनावों में देखने में आया समाज के दो गुट बनकर पैनल बनाकर चुनाव होने लगे हैं जिससे समाज दो से अधिक धड़ों में बंट गया ।

2. दानदाताओं की खून पसीने की बड़ी कमाई को चुनावी खर्चे के रूप खर्च करने का चलन होने लगा है रिकार्ड के अनुसार करीब डेढ़ से दो लाख छात्रावास कोष से खर्च हो रहे है । चुनाव प्रबंध में लगे कार्मिक दस हज़ार से बीस हज़ार तक कमा लेता है ।

3. चुनाव लड़ने वाले पैनल क़रीब तीन तीन लाख खर्च करके चुनाव लड़ता है । इसप्रकार क़रीब एक चुनाव में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से क़रीब दस लाख रूपए चुनाव में खर्च हो रहे हैं यानि दोनों चुनाव में क़रीब 15 से 20 लाख खर्च हो रहे हैं ।

4. चुनाव जीतने के बाद छात्रावास का पैसा खर्च करके छात्रावास के विकास के लिए चंदा एकत्रित करने जाते हैं ।

5. फिर कार्यकारिणी चुनाव जीत कर छात्रावास में दो महँगे कार्मिकों को नियुक्त कर उन लोगों को रोज़गार देकर स्वयं समाज सेवा से फ़्री हो जाती है l

6. यदि हम इन सब बातों पर गौर करें तो निष्कर्ष यह निकलता है कि गरीब समाज के लिए ऐसा चुनाव दोहरी मार करता है । होना यह चाहिए कि Pay-back Society के सिद्धांत पर जो लोग समाज सेवा के लिए आएँ वे किसी कार्मिक को बिना प्रतिफल दिए स्वयं कार्य करें, हमारे समाज में निःशुल्क सेवा करने वालों की कमी नहीं है।

7. चुनाव खर्च बचाने के लिए हमें सर्वसम्मति से कार्यकारिणी का चयन करना चाहिए इसप्रकार हम आगामी कार्यकारिणी के लिए कम से 10 लाख रूपये की बचत कर समाज सेवा कर सकते हैं । समाज की निःशुल्क सेवा करने वाले लोग और जिनके पास सेवा करने का समय हो उन लोगों को ही हमें कार्यकारिणी में लाना चाहिए ।

इन सब विषयों पर मंथन करने के लिए शीघ्र ही एक खुली मीटिंग का आयोजन हो ।

सादर

लोकेश सोनवाल

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक

समाज का सजग प्रहरी ।

Saturday, September 12, 2020

मर्यादा के अभाव में बिखरते परिवार, टूटता समाज और दम तोड़ते रिश्ते !

 


दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l

समाज और परिवार कुछ व्यक्तियों के सामूहिक रूप से रहने पर बनता है l हर व्यक्ति किसी-न-किसी परिवार का सदस्य रहा है या फिर है। समाज और परिवार के लोगो मे एक दूसरे के साथ आपस में कुछ रिश्तों के, बंधन से भी जुड़े होते हैं, जेसे माता-पिता, दादा दादी, चाचा चाची, मामा मामी, मौसा मौसी, बेटा-बेटी, भाई-बहन और ताऊ ताई इत्यादि । ये रिश्ते एक-दूसरे के प्रति प्रेम, सम्मान, सहनशीलता, शिष्टता, विश्वास, ईमानदारी, साहस और अनुशासन जेसे मानवीय गुणों से बंधे रहते हैं और एक मजबूत, सुखी परिवार और समाज की रचना करते हैं |

जब पिता अपने बेटे से गुस्से में कुछ कहता है तो बेटे की सहनशीलता और शिष्टता बेटे को पिता की डांट चुपचाप बिना विरोध किये सुनने को प्रेरित करती है । पत्नी, बेटा और बेटी सब पिता को मुखिया मान के उसका सम्मान करते हैं और  उसके अनुशासन में रहते हैं | इसी तरेह पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और ईमानदारी दोनों को एक दूसरे का अटूट अंग बना देते हैं और जीवन भर का अटूट रिश्ता बन जाता है । जिसे हम संयुक्त परिवार और समाज कहते है l

वर्तमान में संयुक्त परिवार बिखर रहे है । अब नाम मात्र के ही संयुक्त परिवार बचे हैं l एकल परिवार की आंधी में कोई ऐसा आदर्श एकल परिवार भी नहीं हैं जिसके सदस्य सुखपूर्वक रहते हों । अक्सर देखा गया है कि लोग अपनी बातों में कहते हैं 'जमाना बदल गया है' क्या वास्तव में जमाना बदल गया है जब इस बात पर गौर करे तो पाते हैं कि जमाना तो वहीं का वहीं है l हाँ कुछ स्वार्थी लोगो ने परिवार और समाज के बिखराव का अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए आर्थिक और सामाजिक स्तर पर समाज को जब चाहा जैसा चाहा बदलाव कर दिया, चाहे वो समाज के लिए सही हो या ना हो ।

आज हम लोकतंत्र की सीढ़ी पर खड़े हैं । जहाँ सरकार और समाज लोककल्याण के लिए नीति तो बनाते है पर वो नीतियां लक्ष्य तक पहुँचने से पहले ही दम तोड़ देती हैं । जब हमें स्वतंत्रता मिली थी, तब हमारे नेताओ में बदलाव की राजनीति थी, परन्तु आज के नेताओ में बदले की राजनीति हैं । उस दौर के नेताओं में और इस दौर के नेताओं में सिर्फ इतना सा फर्क हैं, उस दौर में समाज विकास के लिए संघर्ष करते थे और आज इस दौर में एक दुसरे से बदले के लिए लड़ रहे है, जिसका परिणाम विकास का रास्ता बंद हो जाता है l

गुलामी से लेकर आज़ादी तक के सफ़र की बात करें, तो हम कह सकते है कि उस समय हम आर्थिक रूप से ज्यादा मजबूत नहीं थे परन्तु आपसी रिश्तो से ताकतवर थे l उस दौर में अगर गाँव में कोई एक व्यक्ति पिछड़ता था, तो पूरा गाँव उसका साथ देता था । वर्तमान दौर में अगर कोई भाई पिछड़ जाये तो उसका साथ उसका भाई भी नहीं देता । आज चाहे हमारी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई हो, पर ये कहना भी गलत नहीं होगा कि आज हम रिश्तों में बहुत कमजोर हो रहे हैं । इसी कमजोरी के कारण आज समाज का दायरा कम होता जा रहा हैं ।

दशको पहले लोग संयुक्त परिवार में रहकर बहुत खुश रहते थे, आज लोग एकल परिवार में रहकर भी खुश नहीं रह पा रहे है, आज बेटे को बाप नहीं समझ रहा और बाप को बेटा नहीं समझ रहा, एक-दुसरे पर सब बोझ समझते हैं । पहले परिवार साफ-सुथरे सरोवर की तरह होता था, जिसमें कमल ही कमल खिले होते थे। आज के परिवार में ना तो सरोकार का सरोवर है और ना ही कमल रूपी संस्कार है ।

समाज व परिवार रूपी सरोवर में कुछ बंधन भी हुआ करते थे, जिनकों तोड़ पाना संभव नहीं था । जिसमें सासें तो अपनी होती थी, पर उसकी मर्यादा रूपी लगाम समाज व परिवार के हाथों में होती थी । लेकिन फिर भी उस दौर में बंदिश में रहते हुए किसी का दम नहीं गुटता था, बल्कि लोग खुश रहते थे l तब सामाजिक परम्परा और संस्कृति के नाम पर समाज में कई कुरीतियाँ भी सातवें आसमान पर थी l जिसका परिणाम यह हुआ कि वर्तमान समय में सामाजिक आधारों में न रीति रही, न ही नीति रही, सिर्फ और सिर्फ भावनाओं से खेलना इस दौर में आदत सी हो गयी है । परम्परा, संस्कृति और संस्कार बेजान हो गए हैं, और हर इन्सान अपनी खुद की बस्ती में ही गुम हो गये है, जैसे किनारों पर आकर लहरे गुम हो जाती हैं । आधुनिक दौर की इस भाग-दौड़ भरी जिन्दगी में किसी के पास किसी के लिए समय ही नहीं हैं । बस भागते रहो, भागते रहो, यह दौड़ केवल श्मशान में जाकर ही खत्म होती हैं ।

सच है कि आज संयुक्त परिवार बिखर रहे हैं । एकल परिवार भी तनाव में जी रहे हैं । बदलते परिवेश में पारिवारिक सौहार्द का ग्राफ नीचे गिर रहा है, जो एक गंभीर समस्या है । परिवार से पृथकता तक तो ठीक है, किंतु उसके मूल आधार स्नेह में भी खटास पड़ जाती है । स्नेह सूत्र से विच्छिन्न परिवार, फिर घरके दिव्य भाव को नहीं जी पाता क्योंकि तब उसकी दशा परिवार के सदस्यों की परस्पर अजनबी समूहजैसी हो जाती है।

मित्रो आज हमें अपने परिवारों में फिर से शुख शांति लानी है तो आज हमें अपने विवेक से अपने अंतर्मन में झांक कर स्वयं को टटोलना होगा और वास्तविकता को समझ कर फिर से अपनी जीवन शैली और विचारो को बदलना होगा । जिस प्रकार आयुर्वेद में निरोगी काया के लिए वात, पित्त और कफ का संतुलन अनिवार्य बताया गया है, उसी प्रकार पारिवारिक सुख और शांति के लिए स्नेह, सम्मान और स्वतंत्रता का संतुलन जरूरी है । इतिहास गवाह है कि अनुशासित और मर्यादित जीवनशैली को अपनाने से टूटते-बिखरते परिवारों में भी फिर से सुख शांति जैसा वातावरण बन जाता है ।

Thursday, September 10, 2020

नए नियमों के साथ दिल्ली मेट्रो फिर से शुरू, सोशल डिस्टेंसिंग और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को किया तैनात

 


दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने रविवार को विज्ञप्ति जारी कर कहा कि कोरोना महामारी के कारण 22 मार्च से दिल्ली मेट्रो द्वारा अपनी सेवाओं को निलंबित कर दी थी, आखिरकार 169 दिन बाद 7 सितंबर से येलो लाइन (समयपुर बादली से हुडा सिटी सेंटर) मेट्रो लोगों के लिए फिर से शुरू और इसके बाद अगले पांच दिनों की अवधि में 12 सितम्बर तक, बाकी लाइनों पर भी कोविड-19 के लिए सभी सुरक्षा उपायों के साथ मेट्रो का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा ।

अनलॉक-4 में डीएमआरसी ने जारी विज्ञप्ति के अनुसार दिल्ली मेट्रो का परिचालन 7 सितंबर से शुरू कर दिया है l संचालन के साथ ही दिल्ली मेट्रो रेल निगम ने एक बहुत बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत अब मेट्रो सुबह 7 बजे से 11 बजे तक और शाम 4 बजे से 8 बजे तक चल रही है l स्टेशन पर लिफ्ट पर सवार होने के लिए अंगुली से बटन नहीं दबाना होगा। नई व्यवस्था के तहत पैडल पर पैर रखते ही लिफ्ट खुल जाएगी। यात्री बगैर किसी बटन को छुए ही इसमें सवार हो सकेंगे। सफर के दौरान यात्रियों को 2 मीटर की दूरी बनाकर रखनी होगी।

पहले दिन मेट्रो के परिचालन में कोई खास तकनीकी बाधा सामने नहीं आई। स्टेशनों पर भीड़ नहीं होने से यात्रियों के लिए शारीरिक दूरी के नियम का पालन करना भी आसान रहा । इस दौरान स्टेशनों पर सिर्फ एक गेट खुले, जो यात्री बगैर मास्क या चेहरे पर रूमाल बांधकर आए थे, उन्हें वापस लौटा दिया गया। मेट्रो के सभी कोच में एक सीट छोड़कर बैठने की व्यवस्था की गई l

प्रवक्ता ने बताया कि हर कोच में करीब 50 लोगों को सफर करने की अनुमति होगी । इनमें 25 लोग बैठकर व 25 खड़े होकर सफर कर सकेंगे। ऐसे में चार कोच की एक मेट्रो में करीब 200 लोग सफर कर सकेंगे । नए दिशानिर्देश के तहत सामान्य स्टेशनों पर मेट्रो अब 10-15 की बजाय 20-25 सेकेंड रुकेगी। वहीं इंटरचेंज स्टेशनों पर 35-40 की बजाय 55-60 सेकेंड रुकेगी। इससे यात्रियों को बारी से चढ़ने और उतरने का अवसर मिल सकेगा ।

स्टेशन पर लगे एस्केलेटर पर एक सीढ़ी छोड़कर यात्री खड़े हो सकेंगे। नए प्रोटोकॉल की नियमित घोषणाएं की जाएंगी। नए दिशानिर्देश से संबंधित शॉर्ट फिल्में, ऑडियो-विजुअल भी एलईडी स्क्रीन पर प्रदर्शित की जाएंगी। स्टेशनों पर भीड़ के बेहतर प्रबंधन के लिए नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को तैनात किया गया है जिनकी नज़र सोशल डिस्टेंसिंग और भीड़ पर होगी । यात्रियों को सेवाओं की बहाली के साथ सामाजिक दूरी के साथ फेस मास्क और सैनिटाइजेशन जैसे नियमों का पालन करना होगा। 

स्टेशनों पर इन नियमों का सख्ती से पालन :- मास्क पहनना आवश्यक, सिर्फ स्मार्ट कार्ड से किराया भुगतान, टोकन काउंटर बंद रहे, आरोग्य सेतु एप चालू हालत में होना चाहिए, मेट्रो में एक सीट छोड़कर बैठने की व्यवस्था l

डीएमआरसी ने यात्रियों से सार्वजनिक रूप से जहां तक संभव हो अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। डीएमआरसी ने कहा कि इसके अलावा यात्री ऑफिस, घर एवं अन्य कामों के लिए यात्रा को बहुत हद तक कम करने की कोशिश करें। डीएमआरसी ने मेट्रो में यात्रा के दौरान यात्रियों से टॉक लेसकी अपील की है।

 

 

Monday, September 7, 2020

वृक्षारोपण कर सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड लगाए, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने भेट किये 6 ट्री गार्ड

 


दिल्ली,समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l निकटवर्ती ग्राम राजपुरा मे पहाड़ी की तलहटी में स्थित सार्वजनिक शमशान भूमि,शिव मंदिर परिसर सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सामाजिक कार्यकर्ता पूरणमल बुनकर,सी एम अटल के नेतृत्व में यूवाओं ने 11पौधे लगाएँ।इस अवसर पर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट सुल्तान पलसानिया के निर्देशानुसार बैंक प्रतिनिधि मनोज कुमार यादव ने पोधों की सुरक्षा हेतु 6 ट्री गार्ड प्रदान किये।

इस अवसर पर युवाओं ने विभिन्न प्रकार के छायादार व फलदार पौधे लगाए। वृक्षारोपण करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता पूरणमल बुनकर,सी एम अटल ने कहा कि एक वृक्ष सौ पुत्र के समान होता है।इसलिए सभी को अपने जीवन में वृक्ष जरूर लगाना चाहिए।
इस मौके पर सुरेश अटल,कृष्ण अटल, सुमित,अमित,संजय, हिमांशु अटल आदि मौजूद रहे।

सद्भाव के प्रतीक लोक देवता बाबा रामदेव जी महाराज का मंदिर

 


रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया

समाजहित एक्सप्रेस

प्रसिद्ध लोक देवता बाबा रामदेव जी महाराज का मंदिर पोखरण से लगभग 12 किमी की दूरी पर रामदेवरा नामक गांव में स्थित है । यहाँ पर रामदेव जी नें जीवित समाधी ली थी । समाधि-स्थल रामदेवरा में भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष द्वितीया को भव्य मेला लगता है, जहाँ पर देश भर से लाखों हिन्दू-मुस्लिम श्रद्धालु पहुँचते है । बाबा रामदेवजी मुस्लिमों के भी आराध्य हैं और वे उन्हें रामसा पीर या रामशाह पीर के नाम से पूजते हैं ।



बाबा रामदेव जी के मंदिर का निर्माण सन् 1939 में बीकानेर के महाराजा श्री गंगासिंह जी ने करवाया था l उस समय 57 हजार रुपये की लागत आई थी । सद्भाव के प्रतीक बाबा रामदेव महाराज के दरबार में भक्तों द्वारा नारियल ध्वजा चढ़ाकर मत्था टेक कर मनौती पूर्ण करने की कामना करते है । श्रद्धालु बाबा रामदेव महाराज की परिक्रमा करते हुए बाबा रामदेव महाराज की महिमा में जोरदार जयकारे लगाकर आसपास के माहौल को भक्तिमय कर देते है । निसंतान दम्पत्ति कामना से अनेक अनुष्ठान करते हैं तो मनौती पूरी होने वाले बच्चों का झडूला उतारते हैं और सवामणी करते हैं ।

मंदिर में बाबा रामदेव की मूर्ति के साथ−साथ एक मजार भी बनी है। मंदिर में प्रातः 04.30 बजे मंगला आरती, प्रातः 8.00 बजे भोग आरती, दोपहर 3.45 बजे श्रृंगार आरती, सायं 7.00 बजे संध्या तथा रात्रि 9.00 बजे शयन आरती होती है । वर्ष में दो बार रामदेवरा में भव्य मेलों का आयोजन किया जाता है। शुक्ल पक्ष में तथा भादवा और माघ में दूज से लेकर दशमीं तक मेला भरता है। यहां आने वालों के लिए बड़ी संख्या में धर्मशालाएं और विश्राम स्थल बनाये गये हैं। सरकार की ओर से मेले में व्यापक प्रबंध किये जाते है।

मंदिर के समीप ही स्वयं रामदेव जी द्वारा खुदवाई गई परचा बावड़ी अपनी स्थापत्य कला में बेजोड़ है। इस बावड़ी का निर्माण फाल्गुन सुदी तृतीया विक्रम संवत् 1897 को पूर्ण हुआ। बावड़ी का जल शुद्ध व मीठा है। बावड़ी का निर्माण रामदेव जी के कहने पर बणिया बोयता ने करवाया था। बावड़ी पर लगे चार शिलालेखों से पता चलता है कि घामट गांव के पालीवाल ब्राह्मणों ने इसका पुनर्निर्माण कराया था। इस बावड़ी का जल रामदेवजी का अभिषेक करने के काम में लाया जाता है।

गांव के निवासियों को जल का अभाव न रहे इसलिए रामदेव जी ने मंदिर के पीछे विक्रम संवत् 1439 में रामसरोवर तालाब खुदवाया था। यह तालाब 150 एकड क्षेत्र में फैला है तथा इसकी गहराई 25 फीट है। तालाब के पश्चिमी छोर पर अद्भुत आश्रम तथा पाल के उत्तरी सिरे पर रामदेवजी की जीवित समाधी है। इसी क्षेत्र में डाली बाई की जीवित समाधी भी है।

रामदेवजी ने तत्कालीन समाज में व्याप्त छूआछूत, जात−पांत का भेदभाव दूर करने तथा नारी व दलित उत्थान के लिए प्रयास किये। दलितों को आत्मनिर्भर बनने और सम्मान के साथ जीने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने पाखण्ड व आडम्बर का विरोध किया। यहां कोई छोटा होता है न कोई बडा, सभी लोग आस्था, भक्ति और विश्वास से भरे, रामदेव जी को श्रद्धा सुमन अर्पित करने पहुंचते हैं । यहाँ सद्भावना की जीती जागती मिसाल हैं ।

 

 

Friday, September 4, 2020

राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला, 'भारत बंद' के दौरान दर्ज मुकदमे वापस लिये

 


दिल्ली समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l 2 अप्रैल 2018  को भारत बंद आंदोलन के तहत दलित आंदोलन के दौरान पुलिस ने दलित समाज के लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किये थे, जो राजस्थान की राज्य सरकार ने वापस लेने का फैसला लिया है । राज्य सरकार ने विचाराधीन प्रकरण पर विचारोपरांत जनहित में दलित समाज के लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने के लिए, विशिष्ट शासन सचिव गृह (विधि) राजेंद्र कुमार सैनी ने 14 अगस्त को आदेश जारी कर मुकदमे वापस लेने के आदेश दिए हैं ।

स्मरण रहे मार्च 2018 में उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम में किए गए संशोधन के ख़िलाफ़ दलित संगठनों ने अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आरक्षित वर्ग ने लोकतांत्रिक तरीका अपनाते हुए 2 अप्रैल को भारत बंद बुलाया था । इस दौरान प्रदेश की वर्तमान सरकार ने दमनकारी नीति अपनाते हुए आरक्षित वर्ग के लोगों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए थे ।

पिछले कई महीनो से दलित संगठनों के अधिवक्ताओ की ओर से भारत बंद के दौरान एससी-एसटी समुदाय के लोगों पर दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लेने की गुहार सरकार से लगाई गई थी । जिस पर राज्य सरकार ने विचारोपरांत जनहित में दलित समाज के लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया l इस निर्णय पर दलित संगठनों ने राजस्थान सरकार का आभार जताया l

Thursday, September 3, 2020

कोरोना वायरस की भयावहता को कमतर आंकने की गलती जानलेवा साबित हो सकती है- श्रीप्रकाश सिंह निमराजे

 


दिल्ली,समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l गोपाल किरन समाज सेवी संस्था एवं जिला बाल अधिकार मंच (चाइल्ड राइट ऑब्जर्वेटरी) के संयुक्त तत्वाधान में संगीता शाक्य (डिविज़नल कमांडेंट एवं (मुख्य संरक्षक) गोपाल किरन समाजसेवी संस्था के मार्गदर्शन में वरिष्ठ सदस्य श्रीप्रकाश सिंह निमराजे,संस्थापक एवं अध्यक्ष गोपाल किरन समाज सेवी संस्था के नेतृत्व में बैठक की अध्यक्षता जहाँआरा,वीडियो वॉलिंटर,गोआ द्वारा संयुक्त रूप की गई। मुख्य अतिथि आर.ए.मित्तल (सेवानिवृत् एडिसनल कमिशनर सेल टैक्स) रहे l

बच्चों एवं छात्रो मैं जाकर कोरोना लॉक डाउन और उसके बाद के हालत को भ्रमण कर लोगों की समस्याएं सुनी, उसमे बच्चे और उनके परिवार प्रभावित हुआ l लोंगो ने अपने बच्चों को विभिन्न कामो मैं लगाया हैं l

आर.ए. मित्तल जी ने कहा आपने कहा समाज सेवा जुड़ना और विकास के लिए  समर्पण भाव से कार्य करना दुधारू तलवार वर चलाने के समान हैं इसके लिए सामाजिक क्षेत्र मैं काम कर चुके लोगों को पढ़ना पायेगे और उनके जीवन को और उनकी शैली को जिससे हम किये जाने वाले काम को और अपने  जीवन को और प्रभावी बना सके और विभिन जानकारियों के संग्रहण के बात की ।

आपने कहा कि आज बिल्कुल स्पष्ट हो चुका तथ्य ये है: रोगों का उपचार अल्लाह, देवता या भगवान नहीं करते, बल्कि वैज्ञानिक हमें उनसे निजात दिलाते हैं.. मनुष्यों की रक्षा अलौकिक शक्तियां नहीं करतीं, बल्कि उन्हें अन्य मनुष्य ही बचाते हैं l सारा देश सूचना के अधिकार व  इसकी जरूरत से वाकिफ हो व उपने हक को प्राप्त करने के लिए जागृत हो, ताकी हमारे देश की व्यवस्थाएं व पैसा गलत लोगो की भैंट नही चढ़े । बड़ा सवाल अगर सरकारी विभाग घाटे में हैं तो उद्योगपति खरीद क्यों रहे हैं और फायदे में हैं तो सरकार बेच क्यों रही है? डॉ. बी. आर. अम्बेडकर के मूल मंत्र शिक्षा संस्था, संस्था,संघर्ष (एडवोकेसी) पर चलने को समझने पर बल दिया गया।

श्रीप्रकाश निमराजे जी ने कहा कि महिला और बेटी का सम्मान करे और जो जाति के नाम पर शोषण, लिंग के नाम पर शोषण करता हो ऐसे लोगों का बहिष्कार करना चाहिए और उनको सुधारने के उपाय किये जा सकते हैं l कोरोना के कहर से कोई भी अछूता नहीं है l वह सामान्यऔरशक्तिशालीमें कोई भेद नहीं करता l जब साधन-सुविधा संपन्न व्यक्ति कोरोना का शिकार बन सकते हैं, तो आम आदमी उसके लिए एक सॉफ्ट टारगेट है l इसलिए कोरोना वायरस की भयावहता को कमतर आंकने की गलती जानलेवा साबित हो सकती है l देशव्यापी लॉकडाउन खत्म होने के बाद से कोरोना को लेकर जो डर था, वह भी खत्म होने लगा है l जो होगा देखेंगेजैसी मानसिकता हावी हो गई है l यही वजह है कि पॉजिटिव मामलों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है l सोशल डिस्टेंसिंग,मास्क लगाने जैसे नियमों का उल्लंघन आम हो गया है l अधिकांश लोग यह मान बैठे हैं कि उन्हें कोरोना नहीं होगा l जबकि विशेषज्ञ कई बार यह साफ कर चुके हैं कि वायरस का प्रकोप कम नहीं हुआ है और  छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा बन सकती हैं इसलिए सावधान रहिए, सुरक्षित रहिए l

सभी DCRF ने अपने अपने स्तर पर बच्चों के मुद्दे जिसमें स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा के मुद्दों पर विभिन्न विभाग मैं बच्चो के इश्यूज पर जिले में एडवोकेसी करने के लिए प्ररित किया और बच्चे के पर कार्य करना पर बल दिया। जहां कहीं बाल अधिकारों का उल्लंघन होते दिखे आप तुरंत अपने लेटर हेड पर कार्यवाही हेतू संबंधित अधिकारी/विभाग को लेटर लिखे । साथ में न्यूज पेपर की कटिंग संलग्न करें  इस प्रकार आप बाल अधिकारों पर पैरवी कर सकते है। सुबह जागते ही कल के बचे हुए कार्य को पूरा करो सफलता सामने होगी । कल जो खोया उसे ढूंढने में वक्त बर्बाद मत करो । हमें सफलता की आवश्यकता है । जिसके पास उम्मीदें होती हैं,वो चाहे कितनी भी बार हार जाये, लेकिन जीवन में हार नही सकता है। अतः आज से ही कुछ ऐसा करें कि जिससे आपकी पहचान आपके काम से हो आपके नाम पर हो ।

सुश्री जहांआरा जी ने स्किल डेवलपमेंट, जेंडर Sensitization करने पर बल दिया, और परदर्शित पर जोर दिया l सामाजिक संस्थाएं हमेशा से ही समाज हित के लिए अच्छा काम करती आई हैं। सामाजिक संस्थाएं समाज को संवारने का काम कर रहीं हैं। चाहे फिर दुनिया को अपनी गिरफ्त में लेने वाली अदृश्य महामारी कोविड-19 हो या फिर समय-समय पर आने वाले भूकंप व तबाही या फिर परेशान व असहाय लोगों की मदद की बात हो। इसमें से एक है संस्था जिसमें संस्था ने समाज सेवा के रूप में विश्व पटल पर अलग पहचान बनाई है। यह मेरा सौभाग्य है कि मैं इस संस्था से जुड़ी और आज संस्थापक के नेतृत्व में सेवा कार्य करने का अवसर मिल रहा है।  मैं पहले से ही समाजसेवा व कोविड-19 जैसी महामारी से त्रस्त लोगों की मदद कर रही थीं लेकिन अब यहां इस संस्था ने मुझे एक मंच दिया है जहां मैंने अपनेपन का भाव जागृत हो रहा है। आज हमने संस्था के माध्यम से यहां क्षेत्र में लोगों को राशनए सेनेटाइजर,मास्क व जरूरत की अन्य वस्तुओं का वितरण किया गया। देश-दुनिया में परेशान लोगों के जीवन में खुशी घोलने के बाद अब संस्था ग्वालियर-चंबल अंचल में भी भागीरथी प्रयास शुरू किए हैं। संस्था द्वारा  जनसेवा का यह कार्य आगे भी यथावत जारी रहेगा।

शांतिशरण गौतम ने कहा कि संस्था द्वारा लगातार सामाजिक कार्य किए जा रहे हैं। संस्था ने ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड-19 से बचाव और लोगों को जागरूक करने को जो अभियान चलाया है वह वाकई में तारीफ के काबिल है।

संस्था D C R F के कुछ साथी प्रतिनिधियों द्वारा स्वास्थ्य संस्थानों का भ्रमण कर अवलोकन करने की बात कही ताकि विभिन्न संचालित स्वास्थ्य संस्थानों की वास्तविक स्थिति जानकर विभागीय अधिकारियों से चर्चा की जाये। DCRF  एवं संस्था द्वारा संचालित गतिविधियों पर डॉ. पुरुषोत्तम अर्गल द्वारा व्यापक जानकारी देते हुए सभी के सुझाव आमंत्रित किए, संस्था की व्यापकता के प्रयास करने के लिए बात रखी गई। संस्था के साथ जुड़ने के लिए उनकी सहमति दी। बच्चों के सरक्षण एवं विकास पर कई लोगों ने अमूल्य विचार व्यक्त किया और कहा कि निश्चित रूप से संस्था का यह सराहनीय कार्य है।

श्रीप्रकाश सिंह निमराजे संस्थापक एवं अध्यक्ष गोपाल किरन समाज सेवी संस्था (रजि.) द्वारा प्राकृतिक संरक्षण बचाने का संकल्प लेते हुए वृक्षारोपण करने का निर्णय किया गया l कार्यक्रम में संचालन युवराज खरे व आभार व्यक्त डॉ. पुरुषोत्तम अर्गल ने किया ।

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सावधान रहिए, सुरक्षित रहिए l