Saturday, October 19, 2019

रैगर समाज के युवाओं में समाज के प्रति रुझान बहुत कम हो रहा है ।



दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l युवा जो नई सोच रखते हैं। समाज को आगे लेकर जाने की इच्छाशक्ति रखते हैं और अपने हौसले और जज्बे से समाज में फैली विसंगतियों और बुराइयों को जड़ से उखाड़ फेंक सकते है, ईमानदारी से वे सबकुछ कर समाज में बदलाव ला सकते है । युवा ही समाज की दिशा बदल सकते हैं। आज के तथाकथित अनुभवी सामाजिक संगठनों के लोग युवाओं को आगे लाना ही नहीं चाहते l युवाओ की भावनाएं तथाकथित सामाजिक नेताओं के लिए कोई महत्व नहीं रखती है। इसके कारण ही समाज पिछड़ता जा रहा है। पढ़े-लिखे युवाओं को आगे लाने से ही समाज का भविष्य उज्जवल होगा।
आज के दौर में समाज पर भौतिकतावाद, उपयोगितावाद व उपभोक्तावाद हावी हो गया है जिसके कारण रैगर समाज के युवाओं में समाज के प्रति रुझान बहुत कम हो रहा है । समाज उन्हीं लोगों को भाता है जो अपने सामाजिक परिवेश से कुछ सीखना चाहते हैं, समाज कल्याण की भावना रखते हैं ऐसे लोगो की संख्या बहुत कम हो गई है। लेकिन आज का युवा इसके बिलकुल उलट है वह केवल अपने तक सीमित है ऐसे में समाज की उसे जरूरत महसूस नहीं होती है l इसकी कई वजह हैं :-
पहला तो पारिवारिक स्तर पर समाज को बढ़ावा देने व बच्चो में रुचि पैदा करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए जाते, वहीँ पहले जैसे आध्यात्मिक, मेहनती व आदर्श संस्कृति स्थापित करने वाले लोग नहीं रह गए हैं कि युवा उनका अनुसरण करे l संवेदनशीलता समाज व परिवार से गायब होती जा रही है और इंसान यांत्रिक हो गया है। लोगों की सोच में लघुता व संकीर्णता आ गई है l
दूसरी वजह यह है कि आधुनिक प्रचार प्रसार के माध्यम जैसे टीवी, इंटरनेट व सोशल नेटवर्किग साइटों के जाल में समाज के युवा उलझ कर रह गया है l ये साधन युवा वर्ग को दूसरी दिशा की ओर ले जा रहे हैं जो कि समाज के अस्तित्व के लिए खतरा साबित हो रहे हैं ।
तीसरी वजह यह कि आज का युवा केवल नौकरी और पैसा कमाने की होड़ में समाज की परवाह नहीं करता l आज के महंगाई के दौर में समाज के युवा को अगर कहीं से भी पैसा और नौकरी मिल रही है तो वह समाज को दरकिनार कर देता है l
रैगर समाज के संगठनों को समाज के युवाओ में समाज के प्रति रूचि पैदा करने हेतु जन-जागरूकता अभियान की बहुत जरूरत है, जिसमें समाज के जिम्मेदार लोगो को भी आगे आना चाहिये । जहाँ जहाँ समाज के लोग बसते है वहां पर गोष्ठियां, चर्चा-परिचर्चा, खेल प्रतियोगिता व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कराना अति आवश्यक है । युवाओं को समाज में रूचि लेने हेतु प्रेरित करना व कार्यक्रमों में भागीदार बनाकर उनको समय-समय प्रोत्साहित करना समाज के जिम्मेदार लोगो का दायित्व बनता है ।
वहीं युवाओ को सिखाना होगा कि वे अपने जीवन में सच को सच कह कर निर्णायक भूमिका निभायें, न कि किसी की चाटुकारिता करें । युवाओ में अंधश्रद्धा और अंध-विरोध दोनो खतरनाक हो सकते हैं। किसी भी विचार, सोच, नीति, संगठन  या व्यक्ति के प्रति युवाओ की न तो अंधश्रद्धा होनी चाहिए, और न ही अंधविरोध। समाज में घुसी बुराईयों को दूर करने हेतु व्यंग बाण चलाना ही चाहिये । किसी पूर्वाग्रह से सदैव बचना होगा । किसी दायरे में न बंधकर सामाजिक उत्थान के चिंतन को व्यापक आयाम देना । किसी भी युवा को समाज,राज्य व देश के शासन-प्रशासन की समालोचना भी करनी चाहिये ताकि शासक व प्रशासक वर्ग को उनकी अपनी कमी से अवगत करा सकें और वे अपने कार्यों को और बेहतर कर सकें । समाज के युवाओ को निर्भीक अवश्य होना चाहिये और इसमें समाज के जिम्मेदार बुजुर्ग लोगों को युवाओ का सहयोग करना चाहिये ।
(इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं l)

Friday, October 18, 2019

रैगर समाज की सामाजिक दिशा और दशा पर साहित्यकार, कवि विनोद कुमार गहनोलिया का लेख



दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l वर्तमान में अनेक प्रकार की सामाजिक-आर्थिक-सांस्कृतिक-भौगोलिक-ऐतिहासिक और अन्याय व शोषण की समस्याऐं रैगर समाज के सामने उपस्थित हैं l  अनेक समस्याओं को लेखक और पत्रकार अपनी सशक्त लेखनी के माध्यम से निर्भीक और स्वतंत्र होकर समाज, राज्य व देश के सामने उपस्थित करते हैं, ताकि समाज और देश के शासन-प्रशासन में जिम्मेदार नागरिकों में जन-जागरूकता और सतर्कता का प्रसार हो, और वे अपनी जिम्मेदारी को बखूबी समझें और अपने कार्यों को और बेहतर कर सकें | निर्भीक लेखको और पत्रकारो के ऐसे कार्यों में समाज के प्रबुद्ध लोगों को सहयोग करना चाहिये ।
रैगर समाज के प्रत्येक कवि, साहित्यकार और पत्रकार ने अपने जीवन में कभी न कभी, किसी न किसी रूप में जातिगत अन्याय, अपमान और उपेक्षा का दंश झेला है । दर्द के साथ इन लेखको का रिश्ता जन्म से है । इतिहास गवाह है कि साहित्यकार और पत्रकारों के लेखन ने, जब जब समाज, राज्य व देश में कुछ घटित होता है तो अपनी लेखनी से समाज की प्रतिष्ठा और नीति-नियम के प्रति अपना पावन कर्तव्य बड़ी कर्मठता से निभाते रहे हैं | साहित्यकार और कवि विनोद कुमार गहनोलिया ने भी समाज की सामाजिक दिशा और दशा पर अपनी लेखनी के द्वारा समाजहित में लेख लिखकर विचार व्यक्त किये है :-
सामाजिक दिशा और दशा :
ऐसा देखने में लगा है कि रैगर समाज के सामाजिक संगठनों में एक हुडदंगी ग्रुप तैयार हो गया है जो पूर्व नियोजित तरीके से हरेक प्रोग्राम में हुडदंग करने का आयोजन करते हैं । ऐसे होगा सामाजिक एकता एवं विकास ? सामाजिक संगठनों को राजनीतिक अखाड़ा बना दिया गया है । एक पक्ष कांग्रेस तो दूसरा बीजेपी तो तीसरा किसी अन्य से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है । संगठनों के पदाधिकारी संगठन को राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने का साधन समझ कर संगठनों पर कब्जा जमाने में लगे रहते हैं ताकि TRP हाई बन सके ।
सवाल यह है कि जब विरोधी संगठन के प्रोग्राम को फैल करते हैं तब जब दूसरे पक्ष की बारी आती है तब वो भी कसर नहीं छोड़ते हैं । कोर्ट केस, नोटिस, खिलाफत, एवं हो हल्ला, हुड़दंग करना, करवाना आम बात हो गयी है । समाज हित, सेवा कार्य, सामाजिक विकास करना एक दिखावा मात्र रह गया है । ऐसे में क्या कोई संगठन सामाजिक एकता का परिचय दे सकता है ? शायद नहीं । जब समाज का प्रबुद्ध वर्ग ईर्ष्या, द्वेष, विरोधबाजी, अदूरदर्षिता ग्रसित हो, जिनका न कोई विजन हो और न समग्र सोच हो उस समाज का भविष्य कैसा होगा, कल्पनातीत है । हां एकल विकास तो स्वयं के प्रयास से हो सकता जब परिस्थितियां सामान्य हो लेकिन समग्र विकास और परिस्थितियाँ असामान्य हो तो कल्पना से परे की बात होगी । अब आने वाले समय में परिस्थितियाँ असामान्य होती दिखाई दे रही हैं,जिस प्रकार की हवा बहने लगी है उसमें अंधकार दिखाई देता है जिससे मुकाबला करने में हमारे शीर्ष संगठन की दिशा व सामाजिक सोच पिछड़ती नजर आती है । इसका मतलब यह किसी एक कार्यकाल का आकलन करना नहीं है बल्कि विगत का परिदृश्य भी शामिल है ।
ऐसे में क्या किया जा सकता है :-
- ईर्ष्या, अहम व द्वेष छोड़ आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ाया जावे ।
- समर्पण भाव को बढाने हेतु आगे आना चाहिए ।
- संगठन में सभी प्रबुद्ध विचारको, कुटनितिज्ञो, लेखकों रणनीतिकारों को शामिल कर मंडल गठित किया जावे ।
- मुखियाओं के व्यवहार से वैर भाव नहीं झलकना चाहिए ।
- और क्या यदि इसी प्रकार बिखराव, अलगाव जारी रहता है तो सदस्यता त्याग देनी चाहिए ?
यह मेरे निजी विचार हैं एवं किसी पर दोषारोपण करने की दृष्टि से व्यक्त नहीं किये गये हैं । सामाजिक संगठन को और मजबूत, शक्तिशाली बनाने हेतु सुझाव आमंत्रित किए जाते हैं । अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार सभी को है ।
सोच बदलो, समाज व देश बदलेगा ।
जय हिन्द ।
विनोद कुमार (गहनोलिया)
जयपुर

Thursday, October 17, 2019

व्यवसायी रामजी कौशल बारोलिया के गृह प्रवेश की तैयारियां शुरू, नए घर को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है



दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l गृह प्रवेश बहुत ही शुभ कार्य है और इतने बड़े मौके को हर कोई अपने जीवन भर की यादगार बनाना चाहते है l व्यवसायी रामजी कौशल बारोलिया शनिवार 19 अक्टूबर 2019 को उतम नगर स्थित नये घर में विधिवत रीति-रिवाजों के साथ स्वास्थ्य और समृद्धि हेतु शुभ मुहुर्त पर गृह प्रवेश करेंगे l

नए घर में शिफ्ट होने की बात हो तो भारत के लोग शुभ मुहूर्त को लेकर बड़े संजीदा रहते हैं। वास्तु के मुताबिक घर पांच तत्वों से मिलकर बना है-सूर्य, धरती, पानी, अग्नि और वायु और इन सभी का सही तालमेल ही घर में खुशियां, स्वास्थय और सुख-समृद्धि लाता है। उनका मानना है कि अगर शुभ दिन गृह प्रवेश किया जाएगा तो यह सौभाग्य लाएगा और हमेशा स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहती है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक उतम नगर स्थित नये घर के गृह प्रवेश को लेकर जोरदार तरीके से नए घर को दुल्हन की तरह सजाने के लिए तैयारियां चल रही है l मकान के अंदर की तैयारियों को भी आखिरी रूप दिया जा रहा है, रंगरोगन के साथ-साथ सजावट की जरूरी चीजें लगाई जा रही हैं l घर के मुख्य द्वार को आम के पत्तों और गेंदे के फूलों से सजाया जा रहा है और बारोलिया परिवार द्वारा बेहद उत्साहित भाव से अपने रिश्तेदारों व मेहमानों को आमंत्रित किया जा रहा है l

Wednesday, October 16, 2019

महिला स्टाफ नर्स ने चिकित्सा अधिकारी के खिलाफ अभद्र व्यवहार की लिखित शिकायत कर केस दर्ज करवाया



दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l चितौड़गढ़ जिले के कपासन राजकीय चिकित्सालय में नियुक्त महिला स्टाफ नर्स नीलम रेगर ने चिकित्सा अधिकारी गणपत सिंह चौधरी पर शराब के नशे में शनिवार रात को 10:00 बजे अपशब्द और जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने एवं मानसिक रूप से परेशान करने का लिखित में आरोप लगाया है l जिस पर थानाध्यक्ष ने अनुसूचित जाति/जनजाति निवारण अधिनियम की धारा 3 के तहत मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है l


प्राप्त जानकारी के मुताबिक शनिवार रात को 10:00 बजे चिकित्सा अधिकारी गणपत सिंह चौधरी अपनी गाड़ी से स्वास्थ्य केंद्र पर आये और चपरासी के द्वारा महिला स्टाफ नर्स नीलम रेगर को अपशब्द और जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने एवं मानसिक रूप से परेशान करने लगा l इसी प्रकार आये दिन चिकित्सा अधिकारी गणपत सिंह चौधरी महिला स्टाफ नर्स के साथ नशे में मदहोश होकर दुर्व्यवहार करता है l जिसके कारण चिकित्सालय का स्टाफ परेशान है l

चिकित्सा अधिकारी गणपत सिंह चौधरी के तानाशाही पूर्ण दुर्व्यवहार के खिलाफ चिकित्सालय के सभी नर्सिंग स्टाफ एवं सहायक कर्मचारियों ने लिखित में संयुक्त हस्ताक्षर युक्त शिकायत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी चितौडगढ़ को की है l इसके अलावा महिला स्टाफ नर्स नीलम रेगर ने जिला कलेक्टर को चिकित्सा अधिकारी गणपत सिंह चौधरी के तानाशाही पूर्ण दुर्व्यवहार व उत्पीडन के खिलाफ लिखित शिकायत कर सुरक्षा और न्याय तथा उचित क़ानूनी कार्यवाही की मांग की है l
राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन के पदाधिकारियों की और से जिला अध्यक्ष मुकेश उज्जवल ने पीडिता स्टाफ नर्स नीलम रैगर की सुरक्षा और न्याय तथा चिकित्सा अधिकारी गणपत सिंह चौधरी के खिलाफ उचित क़ानूनी कार्यवाही करने की मांग की है l  
पब्लिक अगेंस्ट करप्शन सोसाइटी राजस्थान ने भी पीडिता नीलम रैगर के साथ चिकित्सा अधिकारी गणपत सिंह चौधरी के द्वारा तानाशाही पूर्ण दुर्व्यवहार व उत्पीडन किये जाने की निदा की है और मांग की कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारी को तुरंत निलंबित कर उचित क़ानूनी कार्रवाई की जाए l यदि समय पर जांच व कार्यवाही नहीं होने की स्थिति पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है l

“आपां ने तो बेटी बचाणी है" राजस्थानी फिल्म के निर्माता की समाजहित एक्सप्रेस से बातचीत



दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस l चंद्र फिल्म्स प्रोडक्शन के बैनर तले बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की थीम पर बनी राजस्थानी फिल्म आपां नै तो बेटी बचाणी हैके लेखक, निर्माता एवं निर्देशक राजेन्द्रसिंह शेखावत से दिल्ली के करोलबाग में स्थित कवियत्री चंद्रकांता सिवाल के निवास पर समाजहित एक्सप्रेस के संपादक ने मुलाकात की l राजेन्द्र सिंह शेखावत चूरू के रहने वाले है तथा वो एक पत्रकार भी है । इस मुलाकात के दौरान राजस्थान के नवरत्न गुसांईवाल (समाज सेवक) व दिल्ली के लक्ष्मी नारायण शेरशिया (समाज सेवक) भी मौजूद रहे l

बातचीत के दौरान राजेन्द्रसिंह शेखावत ने समाजहित एक्सप्रेस के संपादक रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया को बताया कि हमने फिल्म के माध्यम से लोगों को यह संदेश देने की कोशिश की है कि बेटी को बेटे से कमतर नहीं समझें और बोझ तो कतई नहीं समझे । उसे भी वही सुविधाएं और प्यार दें जो आप बेटे को देते हैं। जिम्मेदारी से बेटी को पढ़ा-लिखाकर अपने पैरों पर खड़ा करें l समाज में ऐसे लोग भी है जो बेटे की चाहत में गर्भ में ही भूर्णहत्या करवा देते है जो एक सामाजिक बुराई और अपराध है l संदेश-प्रधान फिल्म आपां नै तो बेटी बचाणी हैके द्वारा राजस्थान की हर ढाणी, मजरो, मौहल्लो और देहाती नगरो तक पहुंचाने की पूरी कोशिश की है l

लेखक व निर्माता राजेन्द्रसिंह शेखावत ने कहा कि आपां नै तो बेटी बचाणी हैफिल्म को पूरा परिवार एक साथ बैठकर देख सकता है। शेखावत ने बताया कि खासकर छोटे-बडे गाँवों में बेटियों को सिर्फ पराया धन ही समझते है, इसलिए इस फिल्म की शूटिंग चूरू, मण्डावा, रतननगर और आसपास के गांवों की गई है। इस फिल्म में सभी कलाकारों ने बहुत ही अच्छा प्रदर्शन किया है, बखूबी शानदार किरदार निभाया है। आपां नै तो बेटी बचाणी हैफिल्म को केंद्रीय फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड से U प्रमाण पत्र मिला है । निर्माता निर्देशक राजेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि आगामी हिन्दी फ़िल्म के लिए मैंने दिल्ली की "गीतिका डीगवाल” को अभिनय हेतु आमंत्रित किया है ।

इस फिल्म में मुख्य कलाकार है- नागेन्द्र सिंह, अलीशा सोनी, आशीष गौतम आशु, ज्योति जांगिड़,गजानन्द प्रजापत, जगदीश राठौड़, देव शास्त्री, इमरान खोखर, कविता पारीक, डॉ. बबली वशिष्ठ,कमल शर्मा, सोनम पाटनी (राज पाटनी), सफी मोहम्मद कुरैशी, हनुमान आदित्य, शर्मिला , बादल चौधरी, राजकुमार नायक, रोहताश सिंह, ओम स्वामी, विजेंद्र सिंह, महेंद्र राजवी, वीरेंद्र सिंह, देवराज सिंह, हुकुम सिंह, ऑलविन, विक्रम सिंह, अंजलि प्रजापत, अपराजिता राठौड़, रफीक राजस्थानी आदि l
फिल्म के सह निर्माता सदाम हुसैन कुरेशी हैं। संगीत राजेंद्र सरनोट का है और गीत व स्वर रघुवीर सिंह राठौड़, गरिमा राठौड़, भवानी सिंह, शंकर माहेश्वरी, लोकेश शर्मा और राजेंद्र सरनोट । डीओपी विकास सक्सैना का हैं और संपादन परवेश सक्सैना ने किया है । कोस्ट्यूम की जिम्मेदारी चंद्र कंवर ने संभाली है और गाने कोरियोग्राफ किये हैं रोहित शर्मा ने। शेखावाटी के लगभग 70 कलाकार लोगो की टीम ने इस फिल्म में अभिनय किया है ।


Friday, October 11, 2019

दिल्ली में रैगर पंचायत व महासभा के पास अपने नाम से कार्यालय हेतु निजी भवन नहीं है


दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l आज दिल्ली देश की राजनैतिक राजधानी है और रैगर समाज के लोग लगभग 1895 से दिल्ली में रह रहे है । दिल्ली में ब्रिटिशकाल के दौरान अंग्रेज अफसर बीडन सर की देन है बीडनपुरा, रैगरपुरा और देवनगर आदि l इन क्षेत्रो में बसने के बाद एक दुसरे के आपसी विवाद समाप्त कराने के लिए रैगर पंचायत का निर्माण हुआ, उसके बाद अखिल भारतीय रैगर महासभा बनाई गई l
समाजहित एक्सप्रेस पर प्रसारित होने वाले हिंदी समाचार के निशुल्क अपडेट लगातार प्राप्त करने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें l
रैगर समाज को दिल्ली में निवास करते हुए लगभग 125 वर्ष हो गए l रैगर समाज ने इन क्षेत्रो में मंदिरों का तो बहुत निर्माण किया, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि दिल्ली प्रांतीय रैगर पंचायत और अखिल भारतीय रैगर महासभा का कोई निजी कार्यालय हेतु अपना भवन नहीं बन पाया है l इस बात से प्रतीत होता है कि हमारा समाज अपने विकास के प्रति कितना उदासीन रहा l
हम दिल्ली से बाहर छात्रावास और धर्मशालाओ के निर्माण के लिए उदार हृदय से दान देते है और वहां विशाल भवन बनवाते है और दिल्ली में आपकी अपनी कोई सम्पति नहीं है इसमें कोई शक नहीं है कि राजस्थान और अन्य प्रदेश के लोगो के प्रति आप कितनी बड़ी सोच रखते है l यहाँ पुराणी प्रचलित कहावत याद आ गई “घर का पूत कंवारा डोले और पाडोसी के फेरा”l
रैगर समाज के बाद दिल्ली में आकर बसने वाले अन्य समाजो की पंचायतो और महासभाओं ने अपने निजी कार्यालय बनाये और शिक्षा के लिए स्कूल, स्वास्थ्य के लिए हॉस्पिटल व सामुदायिक भवन बनाये है l दिल्ली में रैगर समाज के समाजसेवी संगठन पारंपरिक तरीके से चंदा इकत्रित कर भव्य कार्यक्रम आयोजित कर मंच, माइक,पगड़ी,सम्मान व भण्डारे की व्यवस्था में सारा पैसा खर्च कर समाज की समृद्धि व विकास की कामना करते रहे है । क्या ऐसा करने से समाज विकास संभव है ?

“जब जागो तभी सवेरा” की पंक्तियों का अनुसरण करते हुए, अभी भी समय है सामाजिक संगठनो के द्वारा तैयार समाज विकास की हर नीति/योजना का विश्लेषण प्रत्येक व्यक्ति और समाजसेवी को साहस और बुद्धिमत्ता के साथ करना चाहिए, और अवसर और आवश्यकता के अनुसार जो अस्वीकार्य हो, उसे अस्वीकार करना चाहिए,  जो सही हो, उसको बढाने में योगदान देना चाहिए, सुधार के लिए, बिना डरे बदलाव करना चाहिए,  यही हम सबका अनिवार्य बौद्धिक कर्तव्य है । तभी समाज विकास की राह पर अग्रसर होगा l

Wednesday, October 9, 2019

पटियाला रियासत के महाराजा भुपिंदर सिंह अपनी 365 रानियों के लिए काफी मशहूर रहे



दिल्ली,समाजहित एक्सप्रेस (RSG) l भारतीय इतिहास में दर्ज एक ऐसे राजा के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने अपने शोक के लिए करीब 365 रानियां रखी थी l वह भारत के सबसे पहले व्यक्ति थे, जिनके पास अपने हवाई जहाज थे। 2930 हीरो वाला नेकलेस जिसका वजन लगभग एक हजार कैरेट था, जिसमें दुनिया का सातवां सबसे बड़ा हीरा जड़ा था, और उस की कुल कीमत 166 करोड़ थी। इस राजा के पास दुनिया की सबसे भौकाली गाड़ी रोल्स रॉयस थी, वह भी एक-दो नहीं बल्कि 44 । वह राजा हिटलर से भी दोस्ती रखता था । आज हम आपको बताने जा रहे हैं, पटियाला रियासत के महाराजा और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर के दादा राजा भूपेंदर सिंह के बारे में जिन्होंने कई दशकों तक पटियाला रियासत पर राज किया ।

पटियाला रियासत के राजा राजेन्द्र सिंह के घर 12 अक्टूबर 1891 को राजा भूपिंदर सिंह का जन्म हुआ था l वर्ष 1900 में राजा राजेन्द्र सिंह की मौत हो गई, पिता की मौत के बाद भुपिंदर सिंह को राज्य का उतरदायित्व मिला l वर्ष 1909 में औपचारिक तौर पर भुपिंदर सिंह को ब्रिटिश सत्ता द्वारा राजा घोषित किया गया l राजा भूपेंद्र सिंह ने पटियाला पर साल 1900 से 1938 तक शासन किया ।
महाराजा भुपिंदर सिंह अपनी रंगीन मिजाजी के लिए काफी मशहूर रहे। महाराजा भूपिंदर सिंह ने अपनी सभी 365 रानियों के लिए पटियाला में 'लीला-भवन' या रंगरलियों का भव्य महल बनवाया जो पटियाला शहर में भूपेन्दरनगर को जाने वाली सड़क पर बाहरदरी बाग़ के करीब बना हआ है। दीवान जरमनी दास के मुताबिक महाराजा भूपिंदर सिंह की दस पत्नियों से 83 बच्चे हुए थे जिनमें 53 ही जी पाए थे।
महाराजा भूपिंदर सिंह जिस थाली में खाना खाते थे उसकी कीमत करीब 17 करोड़ के पास थी । खास बात यह थी कि उनके बर्तनों पर चांदी और सोने की परत चढ़ी हुई है । राजा का यह डिनर सेट लंदन की कंपनी गोल्ड स्मिथ्स एंड सिल्वर स्मिथ्स ने तैयार किया था l
भूपिंदर सिंह के खुद के करीब तीन एअरक्राफ्ट थे । वह भारत के सबसे पहले व्यक्ति थे, जिनके पास अपने हवाई जहाज थे । उन्होंने एयरप्लेन खरीदने से पहले चीफ इंजीनियर को स्पॉट स्टडी करने के लिए यूरोप भी भेजा । उसके बाद विमान खरीदा था ।
बताया जाता है कि राजा भूपेंद्र सिंह की जर्मनी के तानाशाह हिटलर से दोस्ती थी l साल 1935 में बर्लिन ओलंपिक के दौरान भूपेंद्र सिंह की मुलाकात हिटलर से हुई थी l इसमें हिटलर राजा भूपेंद्र से इतने प्रभावित हो गए कि उन्होंने अपनी माय्बैक कार राजा की तोहफे में दे दी थी l

महाराजा के पास 2,930 हीरो वाला एक नेकलेस था, जिसमें दुनिया का सातवां सबसे बड़ा हीरा जड़ा था l नेकलेस का वजन लगभग एक हजार कैरेट था l इसकी कुल कीमत 166 करोड़ रुपये थी l नेकलेस को बनाने वाली कंपनी कार्टियर का इस पर मलिकाना हक है l