Sunday, January 12, 2020

हमने सुना था एक है भारत सब मुल्कों से नेक है भारत

हमने सुना था एक है भारत सब मुल्कों से नेक है भारत 
लेकिन जब नजदीक से देखा सोच समझ कर ठीक  से देखा
हमने नक्शे और ही पाए बदले  हुए सब तौर ही पाए
एक से एक की बात जुदा है, धर्म जुदा है जात जुदा है
आप ने जो कुछ हम को पढाया, वह तो कही भी  नज़र   आया |

जो कुछ मैंने तुम को पढायाउसमे कुछ भी झूठ नहीं
           भाषा से भाषा  मिले तो इसका मतलब फूट नहीं
          इक डाली पर रह कर जब फूल जुदा है पात जुदा
          बुरा नहीं गर यूँ ही वतन में धर्म जुदा हो जात जुदा |

वही है जव कुरआन का कहनाजो है वेद पुरान का कहना
फिर ये शोर - शराबा  क्यों हैइतना खून - खराबा क्यों है ?

                सदियों तक इस देश में बच्चो रही हुकूमत गैरों की
          अभी तलक हम सबके मुँह  पर धुल है उनके पैरों की,
          लडवाओ और राज करोयह उन लोगो की हिकमत थी
          उन लोगों की चल में आना हम लोगों की जिल्लत  थी,
          यह जो बैर है इक  दूजे से यह जो फुट और रंजिश है
          उन्ही विदेशी आकाओं  की सोची समझी बखशिश  है |

 कुछ इन्सान  ब्रहान क्यों हैकुछ इंसान हरिजन क्यों है,
एक की इतनी इज्जत क्यों हैएक की इतनी ज़िल्लत  क्यों है ?

धन और ज्ञान को ताकत वालों ने अपनी जागीर कहा
मेहनत और गुलामी को कमजोरों की तक़दीर कहा,
इन्सानों का यह बटवारा वहशत और जहालत है
जो नफ़रत की शिक्षा दे वह धर्म नहीं है , लानत है,
      जन्म  से कोई नीच नहीं हैजन्म  से कोई  महान  नहीं
      करम से बढ़कर  किसी मनुष्य की कोई भी पहचान नहीं |

ऊँचे महल बनाने वाले फुटपाथों पर क्यों नहीं रहते है,
दिन भर मेहनत करने वाले फाकों का दुख क्यों  सहते है ?

खेतों और मिलों पर अब तक धन वालों का इजारा है
हमको अपना देश प्यारा, उन्हें मुनाफा प्यारा है,
उनके राज में बनती है हर चीज़ तिजारत की खातिर
अपने राज में बना करेगी सब की जरुरत की खातिर,

अब तो देश में आज़ादी है अब क्यों जनता फरियादी  है,
कब जएगा दौर पुरानाकब आएगा नया जमाना ?

सदियों की भूख और बेकारी क्या इक दिन में जाएगी,
इस उजड़े गुलशन पर रंगत आते आते आएगी,
ये जो नये मनसूबे है ये जो नई तामीरे है 
आने वाली दौर की  कुछ धुधली -धुधली तस्वीरे है,
तुम ही रंग भरोगे इनमें तुम ही इन्हें चमकाओगे
नवयुग  आप नहीं आएगा नवयुग को तुम लाओगे । 

Tuesday, January 7, 2020

समाज विकास के लिए सबको सामाजिक एकता के लिए प्रयास करना होगा



रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया (पत्रकार)
हमारे रैगर समाज में राजनीतिक परिदृश्य में संभावनाओं, नेतृत्व एवं विकल्पों की बहुतायत है । लेकिन सामाजिक एकता के अभाव में पिछड़े हुए है, इस बात से हम भली भांति परिचित हैं l हमारे रैगर समाज में धार्मिक नेतृत्व भी है जो धर्म एवं हमारी परंपराओं के बारे में मार्गदर्शन देता रहता है, इस बात से भी हम अवगत हैं l इन दोनों के बीच में फंसा हुआ है अपना समाज, क्योंकि अपने यहां सामाजिक नेतृत्व का अकाल सा है । किसी भी सामाजिक संगठन और सामाजिक नेता ने समाज में हो रहे विभाजन, अत्याचार, अन्य जातियों द्वारा किये जाने वाले शोषण को रोकने, सामाजिक वैमनस्य को समाप्त कराने जैसे कार्यों को किसी ने लक्षित नहीं किया । किसी ने भी समाज को एकीकृत करने का लक्ष्य नहीं बनाया । धर्मगुरु स्वामी ज्ञान स्वरुप महाराज व त्यागमूर्ति स्वामी आत्माराम लक्ष्य जैसे संत-महात्मा तो दूर, कोई भोलाराम तोंगरिया और धर्मदास शास्त्री जैसा भी फिर नहीं आया जो सामाजिक बिखराव, अत्याचार,अन्याय, सामाजिक विषमताओं व कुरीतियों को दूर कर सके ।
वर्तमान में हमने समाज से राजनीति व सामाजिक क्षेत्र में अपने अपने ग्रुप के बड़े नेता तो पैदा किए, लेकिन उन नेताओ ने राजनीति के अतिरिक्त सामाजिक एजेंडे को कभी आगे नहीं बढ़ाया । उन्हें तो केवल सत्ता, पद और अधिकार का लक्ष्य सामने दिखता है l सुविधाजीवी सोच कभी समाज विकास का बीड़ा नहीं उठाती । उनकी राजनीति के लिए समाज का व्यक्ति केवल एक वोटर है । धर्माधिकारियों के लिए समाज का व्यक्ति एक अनुयायी है । जिस दिन समाज का व्यक्ति इस बात को भलीभांति समझ लेगा तो समाज विकास की ओर अग्रसर होगा l हमारे समाज को केवल समर्थ सामाजिक नेतृत्व की जरूरत है l
अगर हमने सामाजिक एकता और समर्थ सामाजिक नेतृत्व के लिए कुछ नहीं किया गया तो सामाजिक बिखराव समाज को अनंतकाल तक डसता रहेगा । इसलिए समाज की एकता प्राथमिक आवश्यकताओं में से एक है । छोटे छोटे धड़ो और ग्रुप्स की अवधारणा से हटकर समाज की एकता और भाईचारे का वातावरण बनाने का समय हमारी प्रतीक्षा कर रहा है । सामाजिक एकता की शुरुआत कहीं से तो करनी ही होगी । इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति, परिवार और समाज का दायित्व है कि अपने अपने स्तर पर समाज में एकता स्थापित करने का प्रयास करे ।
(इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं l)

Monday, January 6, 2020

ग्वालियर में आल इंडिया एक्शन फॉर बुद्धिस्ट लॉ पर एक दिवसीय बुद्धिस्ट संगोष्ठी आयोजन



दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l आल इंडिया एक्शन फॉर बुद्धिस्ट लॉ पर एक दिवसीय बुद्धिस्ट संगोष्ठी आयोजन जाटव धर्मशाला ट्रस्ट,  तिकोनिया, मोरार ग्वालियर में किया गया l जिसका उद्घाटन दया सागर बौद्ध (बुद्ध विचारक एवं विशेषज्ञ, पाली भाषा लखनऊ) ने किया l मुख्य अतिथि डॉ० प्रवीन गौतम (एसोसिएट प्रोफेसर GRMC) थे l विशिष्ठ अतिथि आर.ए. मित्तल (से.नि. डिप्टी कमिश्नर,वाणिज्य विभाग), डॉ० पी.एस. बौद्ध (धर्म प्रचारक), डॉ० देवीलाल अशिह्या बौद्ध (से.नि. अधीक्षक) मौजूद थे l इस संगोष्ठी की अध्यक्षता श्रीप्रकाश निम्रजे ने की l

भगवान बुद्ध के पुराने वैभव को जानने के लिए आल इंडिया एक्शन फॉर बुद्धिस्ट लॉ पर एक दिवसीय बुद्धिस्ट संगोष्ठी आयोजन जाटव धर्मशाला ट्रस्ट,  तिकोनिया, मोरार ग्वालियर में किया गया l जिसमें अलग-अलग जगहों से आए हुए विभिन्न बौद्ध विद्वानो ने भाग लिया l संगोष्ठी मे विद्वानों और बौद्ध भिक्षुओं के द्वारा स्थानीय एवं आसपास के लोगो को बौद्ध परम्परा की तमाम विधाओं से रूबरू कराया गया । इस एक दिवसीय बुद्धिस्ट संगोष्ठी में श्रद्धालुओं को पाली भाषा के संदर्भ में विस्तृत ज्ञान दिया गया l

संगोष्ठी में वक्ताओ ने चर्चा के दौरान बताया कि सबसे पुराना धर्म बौद्ध है, बौद्ध शिक्षाओं का मुख्य उद्देश्य व्यति के मोक्ष या निर्वाण को सुरक्षित रखना था l 2200 वर्ष पूर्व दुनियाभर में बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने भिक्षुओं के ध्यान और अन्य गतिविधियों के लिए गुफाओं का निर्माण किया था ।
दुनिया में सहनशीलता और शांति के लिए बौद्ध दर्शन एक ऐसा अनुशासन है जो स्वतंत्र, महत्वपूर्ण विचार को प्रोत्साहित करता है, साथ ही यह दुनिया को समझने के लिए बेहतर समझ देता है। बौद्ध धर्म ने औरतों व शूद्र के लिए दरवाजे खोल कर समाज मे एक नया महत्वपूर्ण प्रभाव डाला l बौद्ध धर्म ने लोगों को किसी भी चीज़ को हल्के में न लेने के लिए सिखाया बल्कि बहस और योग्यता के आधार पर न्याय करना सिखाया, शिक्षा सीखते रहने की सुविधा और प्रक्रिया है ।
बौद्ध धर्म ने लोगों के बीच राष्ट्रीयता का प्रचार किया l  बौद्ध भिक्षुओं ने पाली को संस्कृत के साथ मिलाकर एक नई भाषा का निर्माण किया जिसे संकर संस्कृत कहा गया l संगोष्ठी में जहाँआरा,डॉ० पुरुषोतम अर्गेल, राजकुमार मटोली, फूल चन्द मौर्या, हरिशंकर अस्थाना,वृन्दावन मेवाड, भंते धमकिर्ती इत्यादि शामिल हुए l


युवा रैगर समाज सुल्तान पुरी के तत्वाधान में नववर्ष को बाबा रामदेव जी महाराज की शोभायात्रा निकाली गई l



दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l सुल्तानपुरी में युवा रैगर समाज व इनके समस्त सहयोगियों द्वारा बुदवार 01 जनवरी 2020 को नववर्ष के उपलक्ष में लोकदेवता बाबा रामदेव जी महाराज की भव्य विशाल शोभायात्रा सुल्तानपुरी क्षेत्र के विभिन्न मार्गो से प्रात: 11 बजे भव्य झांकियां व बैंड-बाजो के साथ धूमधाम से निकाली गई l  जिसमे मुख्य अतिथि पूर्व विधायक जयकिशन थे l




बुदवार को प्रात: 10 बजे से ही जन-जन के आराध्य बाबा रामदेव जी महाराज की भव्य विशाल शोभायात्रा में शामिल होने के लिए सुल्तान पुरी क्षेत्र के समाज के लोग व सामाजिक और धार्मिक संस्थाओ के श्रृद्धालु एकत्रित होने शुरू हो गए थे जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे रामदेवरा का मेला सुल्तानपुरी में हो रहा है l

आयोजक युवा रैगर समाज के पदाधिकारीगण व इनके समस्त सहयोगियों द्वारा अतिथियों और सामाजिक और धार्मिक संस्थाओ के पदाधिकारियों को मंच पर आमंत्रित कर पगड़ी बांधकर स्वागत सम्मान कर रहे थे l  बाबा की शोभायात्रा में मुख्य व विशिष्ट अतिथि पूर्व विधायक जयकिशन, वरिष्ठ समाजसेवी ईश्वरलाल दोतानिया, मंगोलपुरी से रोहतास कुमार बारोलिया, ज्वालापुरी से समाजहित एक्सप्रेस के संपादक रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया, नरेश कुमार बोकोलिया, ओम प्रकाश तोंगारिया,बिरदी चन्द नारोलिया, नांगलोई से राकेश कुमार मौर्या आदि का भी स्वागत किया गया l
बाबा की शोभायात्रा को सुल्तानपुरी में बड़ी ही धूम धाम और बेंड बाजो के साथ विभिन्न मार्गों से निकाली गई । शोभायात्रा में बाबा ध्वजा लिए युवा महिलाओ और युवाओ की टीम आगे आगे चल रही थी l स्कूली बच्चो का बेंड भी शोभयात्रा का नेतृत्व कर रहा था l शोभायात्रा के दौरान सुल्तानपुरी क्षेत्र को विशेष रुप से सुसज्जित किया गया और जगह.जगह स्वागत द्वार लगाए गये थे, जहाँ पर शोभायात्रा के साथ चल रहे श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया l सर्व समाज के धार्मिक, सामाजिक और राजनेतिक बंधुओ ने बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया ।

सुल्तानपुरी क्षेत्र की सामाजिक व धार्मिक संस्थाओ की और से पंडाल लगा कर ठंडे पेय जल और भंडारे की व्यवस्था की गई थी l विशाल शोभा यात्रा में सुंदर सुंदर झांकियों पर और यात्रा मे शामिल श्रद्धालुयों पर क्षेत्रीय लोगो द्वारा पुष्प वर्षा करके बाबा का आशीर्वाद लिया l
इस अवसर पर युवा रैगर समाज सुल्तान पुरी के पदाधिकारीगण मनीष कुमार चांदोलिया,कैलाश कुमार कानखेडिया, हरीश सालोदिया,बंटी पिंगोलिया,अनिल बोकोलिया, तेजवीर सबलानिया व अन्य कार्यकारिणी सदस्य तथा क्षेत्रीय गणमान्य महानुभाव उपस्थित रहे l

Sunday, January 5, 2020

मरुधर भक्ति सागर संगम द्वारा नववर्ष मनाकर, संगठन का विस्तार करते हुए पदाधिकारियों की नियुक्ति की



दिल्ली,समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l मरुधर भक्ति सागर संगम द्वारा शनिवार 4 जनवरी 2020 को ली मेरीडियन होटल में नववर्ष के उपलक्ष में एक कार्यक्रम आयोजित किया l जिसमे प्रधान लक्ष्मण सिंह ने तपस्वी संत मोतीदास महाराज (गुरुजी) के आशीर्वाद और चेयरमैन विनय दास की अनुसंषा के आधार पर संस्था का विस्तार करते हुए पदाधिकारियों की नियुक्ति की घोषणा की और सभी नवनियुक्त पदाधिकारी को नियुक्ति पत्र सौंपे गए l इस अवसर पर बाबा वाहिद खान व समाजहित एक्सप्रेस के संपादक रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया मौजूद रहे l
मरुधर भक्ति सागर संगम परिवार के सदस्यों ने दिल्ली स्थित ली मेरीडियन होटल में केक काटकर नववर्ष को बड़ी धूमधाम से मनाया l इस अवसर पर प्रधान लक्ष्मण सिंह व चेयरमैन विनय दास ने बाबा वाहिद खान शाल उढ़ाकर सम्मान किया तथा रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया को राजस्थान पगड़ी बंधवाकर सम्मानित किया l मरुधर भक्ति सागर संगम परिवार के सभी सदस्यों को तपस्वी संत मोतीदास महाराज (गुरुजी) का आकर्षक चित्र मोमेंटो स्वरुप प्रदान किया गया l
धार्मिक और समाज विकास कार्यों में समर्पित, ईमानदार व लगनशील कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका रहती है । इसी बात को ध्यान में रखते हुए मरुधर भक्ति सागर संगम के प्रधान लक्ष्मण सिंह ने लंबे समय से जुड़े लगनशील कार्यकर्ताओं का मान सम्मान और मनोबल बढ़ाने के लिए मंडल में जिम्मेदारी देते हुए शनिवार को उनके पदों की घोषणा की l जो निम्न प्रकार से है :-
अध्यक्ष पद पर सतीश बैरवा, सोनिया खिंची, (महिला मंडल अध्यक्ष), उप प्रधान राकेश बन्ना, राजेश कश्यप (कोषाध्यक्ष), हेमराज राजपुतिया (प्रचार अध्यक्ष), हेमन्त भारद्वाज (प्रचार प्रभारी), शंकर लाल खिंची (कार्यकर्ता), गुलशन कुंडारा (सदस्य), रेखा दास (कार्यकर्ता), रतन शाह, मोना वाराशि, सुरेन्द्र सुथार (हरियाणा अध्यक्ष) l इन सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को ली मेरीडियन होटल में बाबा वाहिद खान व समाजहित एक्सप्रेस के संपादक रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया व प्रधान लक्ष्मण सिंह के करकमलो द्वारा नियुक्ति पत्र सौंपे गए l
नियुक्ति पत्र सौंपे जाने के उपरांत प्रधान लक्ष्मण सिंह ने कहा कि मुझे पूरी उम्मीद है सभी नवनियुक्त पदाधिकारी पूरी मेहनत और लगन से मरुधर भक्ति सागर संगम को शिखर पर ले जाने के लिए तन- मन-धन से कार्य करेंगे । सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों प्रधान प्रधान लक्ष्मण सिंह और चेयरमैन विनय दास का आभार प्रगट करते हुए विश्वास दिलाया कि वे अपनी जिम्मेवारी पूरी मेहनत और लगन से निभाएंगे ।
इस अवसर पर बाबा वाहिद खान ने सम्मान के लिए मरुधर भक्ति सागर संगम परिवार के सदस्यों का आभार जताते हुए कहा कि चाहे कोई किसी भी मजहब का हो, किसी भी जाति का हो, आप सभी समाज में मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम पहुंचाते हुए ऐसे ही नेक काम करते रहना है ।
समाजहित एक्सप्रेस के संपादक रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया ने नववर्ष की शुभकामना देते हुए कहा की आज हम सब धन कमाने की यात्रा में लगे हुए है, निज आत्म को पहचानने की यात्रा से वंचित जीवन जी रहे है l निज आत्म को पहचानने की यात्रा में बड़े-बुजुर्गो व संत-तपस्वियों का सान्निध्य, ग्रंन्थों का अध्ययन तथा सत्संगों के श्रवण से संभव है l जब आप पूर्ण भाव से प्रभु के हो जाते है तभी आपके जीवन में प्रभु का आना संभव है l मैं मरुधर भक्ति सागर संगम परिवार के सदस्यों के बीच आकर अपने आप को सौभाग्यशाली महसूस कर रहा हूँ l  
देर रात्रि में जनपथ स्थित मैक-डोनाल्ड में भव्य पार्टी का आयोजन किया गया था, जिसमे मरुधर भक्ति सागर संगम परिवार के सभी सदस्यों ने लजीज व्यंजनों का लुत्फ़ उठाया और नववर्ष का आनंद लिया और एक दुसरे को गले मिलकर शुभकामनाये दी l



Friday, January 3, 2020

रैगर नौजवान वेलफेयर सोसाइटी के द्वारा नव वर्ष पर 59 गरीब छात्र छात्राओं को निशुल्क जूते बाटे गये



दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l भटिंडा में रैगर नौजवान वेलफेयर सोसाइटी के द्वारा नव वर्ष पर रैगर मोह्ल्ले में बढ़ती ठंड को देखते हुए पहली क्लास से आठवीं क्लास में पढ़ने वाले गरीब 59 छात्र छात्राओं को निशुल्क जूते बाटे गये । जुते पाकर बच्चे काफी खुश हुए l सभी बच्चे गरीब व मजदूर परिवार से है l


रैगर नौजवान वेलफेयर सोसाइटी के पदाधिकारियों ने देखा कि क्षेत्र में कंपकंपाती सर्दी में ठिठुरते हुए छात्र छात्रायें नंगे पैर स्कूल जाते है और ऐसे ठण्ड लग गई तो ये बेचारे बीमार पड़ जायेंगे और जो माँ-बाप आर्थिक तंगी के कारण बच्चे व अपनी बेसिक जरूरतें भी पूरी नहीं कर पाते, वे दवाई कहाँ से दिलाएंगे l सोसाइटी के पदाधिकारियों ने सोचा कि हम जैसे लोग न्यू इयर का प्रोग्राम मनाने में खाने पीने पर काफी रुपया खर्च कर देते हैं । यदि हम वही रुपया हम गरीब छात्रो की मदद पर खर्च करें तो एक नेक कार्य होगा l

ऐसा निर्णय लेकर सभी सदस्यों ने धनराशि एकत्र कर पहली क्लास से आठवीं क्लास में पढ़ने वाले गरीब 59 छात्र छात्राओं को निशुल्क जूते बाटे l इस अवसर पर प्रधान ललित कुमार सेवलिया, जगदीश कुमार सेवलिया,कालीचरण बारोलिया, दीपक कुमार, मुंशी सिंह, मदन उज्जिनिया,  अजय बोकोलिया व अन्य सदस्य भी मौजूद रह कर नेक कार्य के पुन्य के भागीदार बने l


Wednesday, January 1, 2020

समाज से भय और निराशावादी भाव को समाप्त कर, विश्वास और भाईचारे का भाव जगाना होगा



जब भी रैगर समाज की कोई छोटी या बड़ी सभा होती है, तो यह चर्चा छिड़ना लाजिमी है कि समाज सुधरेगा कैसे? समाज में एकता कैसे होगी ? समाज का विकास कैसे होगा? आखिर कब और कैसे सुधरेंगे रैगर समाज के हालात ? सामाजिक लोगो द्वारा समाज की दुर्गति पर चिंता व्यक्त की जाती है । बड़ी उत्तेजक बहसें होती हैं । कभी-कभी तनातनी भी हो जाती है । सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी क्यों नहीं समाजहित की ठोस पहल करके समाज के लिए आर्दश स्थापित करते?
सबसे पहले रैगर समाज के प्रत्येक व्यक्ति को तय करना होगा, कि क्या जो सामाजिक बदलाव हो रहा, क्या वो सही है? जिन हालात में हम रह रहे हैं क्या उससे हम संतुष्ट हैं? क्या समाज के हर तबके तक सामाजिक विकास पहुंच रहा हैं जिसकी उन्हें उम्मीद है? यदि नहीं तो सोचे इन सबका जिम्मेदार कौन है? इन सारे सवालों से जूझना ज़रूरी है और गंभीरता से सोचना ज़रूरी है ।
किसी राज्य या देश का गौरव उसके समाज के लोगों के नैतिक मूल्य होते हैं, समाज में घटनेवाली घटनाएं समाज की छवि बनाती और बिगाड़ती हैं l समाज परिवारों से बना है और परिवार हमसे बने हैं, तो हम बदलेंगें तो निश्चित ही समाज भी बदलेगा l बिल्कुल साधारण सी बात है पर एकदम सच है l व्यक्ति और समाज दोनों परस्पर सापेक्ष है । व्यक्ति के बिना समाज नहीं बन सकता और समाज के बिना व्यक्ति का चरित्र उभर नहीं सकता । समाज से आदर्शों का विलुप्त होना, सदाचारों का खण्डित होना या नष्ट हो जाना व्यक्तिगत जीवन मूल्यों का भी विनाश है, और नैतिकताओं पर व्यक्तिगत अनास्था, सामाजिक चरित्र का पतन है l
समाज की वास्तविकता ये है कि हमारे समाज के बच्चे जो कुछ सीखते है, पहले माँ बाप और परिवार से सीखते हैं, फिर विद्यालय से सीखते हैं अंत में समाज से सीखता है, अगर इन तीनो स्तर में से किसी भी स्तर पर नैतिकता का अभाव हो तो उसका प्रभाव तो बच्चे पर निश्चित पड़ेगा, तो फिर आदर्श व्यक्ति की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?
आजकल सामाजिक नेतागीरी का बहुत बड़ा स्कोप है और बेरोजगार धनबली युवक अब इसमें भी अपने भविष्य की संभावनाओ की तलाश करने लगे हैं । समाज-सेवा तो दिखावा है । जिस व्यक्ति की कहीं कोई विशेष योग्यता नहीं है और वह पैसे वाला भी है और एक बड़ी गाड़ी, स्मार्ट मोबाईल, एक-दो बन्दूकधारी, चार-छह बाहुबली साथ में लेकर स्वयं में राजनेता की स्वयंभू प्राण-प्रतिष्ठा कर लेता है । अब सामाजिक नेता की प्राथमिक योग्यता धनबल एवं बाहुबल हो गई है । ऐसे नये-नवेले नेताओं को अपने समाज की गरिमा,विचाराधारा, इतिहास, सिद्धान्तों और प्रेरणास्त्रोत की जानकारी ही नहीं होती है । धनबल से संख्या-बल का बढ़ना एक सूत्री कार्यक्रम बन गया और गुणवत्ता-बल द्वितीयक हो गया है । वे चुनाव जीतने का केवल एक सूत्री कार्यक्रम बनाते हैं जो उनकी मजबूरी होती है । विपक्ष में वे रहना ही नहीं चाहते और आदर्श विपक्ष की भूमिका का निर्वाहन जानते नहीं हैं । पैसे से सत्ता और सत्ता से जो इच्छा हो उसे अर्जित करने का काम करते है l
संवैधानिक मान्यता है कि निर्वाचित् पदाधिकारी व प्रतिनिधि सामाजिक संगठन में पहुंचकर समाज के लोगो के भविष्य हेतु सामाजिक व आर्थिक विकास की योजना और नियम बनायेंगे। लेकिन सबसे बड़ी विडम्बना तो यह है कि निर्वाचित् पदाधिकारी व प्रतिनिधि समाज के कर्णधार होते हुये भी समाज विकास पर ध्यान नहीं देते और केवल केवल समारोह में अपना स्वागत और सम्मान में लगे रहते है l
सम्मान और सहयोग ही मनुष्य की जीवात्मा की भूख और प्यास है । अगर आप समाज में सम्मान और सहयोग को पाना चाहते हों तो कृपा करके जो समाज के प्रति आपके दायित्व हैं, जो कर्तव्य हैं, वो आपको निभाने चाहिए । आप उन कर्तव्यों और दायित्वों को निभा लेंगे तो बदले में सम्मान और सहयोग पा लेंगे । जिससे आपकी खुशी, आपकी प्रशंसा और आपकी प्रगति में चार चाँद लग जायेंगे ।
समाज में सम्मान और सहयोग को पाने के लिए सबसे पहले ईमानदारी से अपने आपका निर्माण करना, दूसरा अपने परिवार का निर्माण करना,  और तीसरा अपने समाज को प्रगतिशील और  उन्नतिशील बनाने के लिये कुछ न कुछ योगदान देना । अगर आपने इन तीनो सिद्धान्त अपना लिया तो आप विश्वास रखिए,  आपका समाजसेवा का 60% काम तो अपने आप हो जायेगा । इसलिए सामाजिक नेता को व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और समाज निर्माण व विकास के लिये संगठन की गतिविधियाँ चलानी चाहिए l
हम समाज के चुनाव में वोट के जरिये सिर्फ संगठन के मंत्रीमंडल के पदाधिकारियों को बदल देते है, लेकिन संगठन के मंत्रीमंडल के पदाधिकारियों को बदलने से कुछ नहीं होगा l समाज में विश्वास और भाईचारे का हमारा सामाजिक ताना-बाना धनबल एवं बाहुबल के आगे अब टूट गया है और बिखर गया है । समाज के प्रबुद्ध लोग सच बोलने में डरते हैं । गहरे अविश्वास, निरंतर भय और निराशावादी भाव हमारे समाज में व्याप्त है और समाज पर इसी का असर नजर आ रहा है । इससे सामाजिक विकास रुक गया है l जब तक समाज में डर का माहौल खत्म कर भरोसा नहीं जगाया जाएगा, इसके बगैर समाज की हालत नहीं सुधरेगी ।