Saturday, August 8, 2020

सर्वजन विकास एवं सेवा संस्थान की ओर से किया गया वृक्षारोपण

 

दिल्ली समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l जयपुर। शुक्रवार को ग्राम पंचायत में विधानी मे ग्राम सालिगरामपूरा, रामचंद्रपुरा, श्रीकिशनपुरा सहित कई गाँवो की सरकारी स्कूलों, समसान और मंदिर सहित कई जगह पौधरोपण किया गया।  संस्थान के अध्यक्ष सुरेश आलोरिया ने बताया पेड़ लगाओ, हरियाली लाओ और जीवन बचाओ अभियान के तहत अभी पूरी पंचायत के विभिन्न जगहों पर लगभग 500 पौधे लगाने का लक्ष्य है।


भारतीय समाज में आदिकाल से ही पर्यावरण संरक्षण को महत्व दिया गया है । भारतीय संस्कृति में पेड़-पौधों को पूजा भी जाता है। प्राणी जगत को पेड पौधों से पेट भरने के लिए फल-सब्ज़ियां और अनाज प्राप्त होता है । पेड पौधों से हमें औषधियां मिलती हैं। इनसे जीवनदायिनी ऑक्सीज़न भी मिलती है, जिसके बिना कोई एक पल भी ज़िन्दा नहीं रह सकता । इसलिए पेड़ पौधे इंसान की ज़रूरत हैं, उसके जीवन का आधार हैं।


संस्थान के महासचिव सौरभ शर्मा ने बताया की इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में रामस्वरूप रातावाल RAcS (लेखाधिकारी), सालिग्रामपुरा स्कूल के प्रधानाध्यापिका चंचल राजपूत, अध्यापकगण दीपक शर्मा, सतपाल यादव, विकाश शर्मा, शिलावंती मंदोरिया, मीनू मीणा, मिनाक्षी शर्मा, मंजू शर्मा ग्राम रामचंद्रपुरा स्कूल की प्रधानाध्यापिका शालिनी शेरावत, गांव के वार्डपंच धर्मेंद्र आलोरिया, आकाश बजरंगी कार्यकर्ता बजरंगदल, नितेश, रामबाबू, बुद्धि, निखिल धानका, राहुल आलोरिया सहित कई लोग उपस्थित थे।

Thursday, August 6, 2020

अगर न्याय न हुआ हो तो

आज के इस दोफाँक वक़्त में जब आप या तो इधर हैं, या उधर, जब आपकी स्वतंत्र भावनाओं का कोई मोल नहीं बचा, तब भी कुछ बातें कह देनी चाहिये, ट्रोल होने का खतरा उठाकर भी। ताकि आने वाले वक़्त में जब धुंधलका हटे और चीजें साफ नजर आने लगे तो आप अन्याय, अनीति और बेमानी के पक्ष के खड़े न नजर आयें।

सवाल वही है। आज के ए’नकाऊंटर का। जिन चार लोगों का ए’नकाऊंटर हुआ है उनको लेकर मन में कल तक कोई सहानुभूति नहीं थी। मेरी नजर में वे ऐसे दरिंदे थे, जिन्होने मनुष्य होने के अर्थ को खो दिया था। एक जीवित इन्सान की निष्पाप आत्मा को कुचलना, उसकी मर्जी के बगैर उसके शरीर को रौंदना, उसके मन में बसे प्रेम और यौन भावनाओं पर अनैतिक तरीके से कब्जा करने, उसे हासिल करने की कोशिश करना और यह सोचे बगैर यह भी एक इंसानी जीवन है उसे आग के लपटों में झुलसा देना। यह सब सोच कर दिमाग हिल जाता है। क्योंकि मैं उस मनस्थिती में आजकल जी रहा हूं कि अगर किसी से बेवजह बहस भी हो जाये और उसमें अपनी गलती हो तो, घंटों पश्चाताप से भरा रहता हूं। ऐसे में यह सोचना असह्य है कि कोई किसी के साथ ऐसा कैसे कर सकता है।

अगर उस रोज या तो उस महिला ने, या पुलिस वालों ने या आसपास के लोगों ने बचाव में उसकी हत्या कर दी होती तो शायद ही कोई अफसोस होता। मगर आज वह बात नहीं है। जाने वाली जा चुकी है, पुलिस ने सन्दिग्धों के रूप में उनका नाम दर्ज किया था, बहुत मुमकिन है कि ये चारों लोग असली आरोपी रहे होंगे। मगर क्या ऐसा भी हो सकता है कि इनमें से कोई एक या दो आरोपी न हो। किसी संदेह में उसका नाम आ गया हो। मगर पुलिस ने देश के गुस्से को शांत करने के लिए चारो को मौत के घाट उतार दिया।

मेरा सवाल यह है कि क्या इस ए’नकाऊंटर से उसी दुखी स्वर्गवासी महिला को न्याय मिल गया? यह देश के सम्वेदनशील आवाम को जो इस घटना के बाद से ही सदमे और हताशा में डूबा है। सवाल यह भी है कि क्या यह न्याय है या प्रतिशोध? और यह बहुत बारीक सवाल है।

यह सच है कि इस देश में हर साल 40 हजार से अधिक रे’प होते हैं और इनमें सजा दिलाने की दर बहुत कम है। ऐसे में लोगों का न्याय व्यवस्था से भरोसा उठना स्वाभाविक है। वैसे भी न्याय व्यवस्था की जो सुस्त रफ्तारी है, उसमें बहुत कम मौकों पर न्याय होता नजर आता है। देश की सुस्त और लचर न्याय व्यवस्था से उकताये लोगों को तेलंगाना पुलिस का यह सड़क पर फैसला किया जाना अच्छा लगा होगा।

इससे पहले भी कई पुलिस अधिकारी अपराधियों का सीधे ए’नकाऊंटर करके जनता का हीरो बने हुए हैं। अब तक 56 नाम की फिल्म इसी थीम पर बनी थी। मगर हमने बाद में देखा कि मुंबई में कई ए’नकाऊंटर स्पेशलिस्ट बाद में कॉन्टैक्ट किलर बन बैठे और पैसे लेकर मर्डर करने लगे। अभी हाल ही में हमने यह खबर देखी कि छत्तीसगढ़ में कुछ निर्दोष आदिवासियों को नक्सली बता कर मार दिया गया था। अगर पुलिस अपनी सर्विस रिवोल्वर से सड़क पर न्याय करने लगे तो अन्याय होने के खतरे में भी उतनी ही बढोतरी हो जाती है।

मगर मूल सवाल है कि क्या यह न्याय है या प्रतिशोध। और क्या प्रतिशोध का पूरा होना न्याय का पूरा होना है? अगर किसी ने मेरे साथ कुछ गलत किया और मैं भी उसके साथ कुछ गलत कर दूं, तो क्या हिसाब बराबर हो जाता है? इसके बनिस्पत वह अगर खुद सामने से आकर गलती मान ले या मेरे आसपास का समाज उसे कहे कि इस मामले में तुमने गलती की है, भले उसे कोई सजा न मिले। न्याय कौन सा है?

इसी फेसबुक पर हम एक दूसरे को गलत साबित करने के लिए लगातार झगड़ते रहते हैं। किसी गाली देने वाले को गाली देकर हमारा मन नहीं भरता, हम चाहते हैं कि फेसबुक के समाज के सामने उसकी गलती साबित हो। तो किसी कसूरवार, किसी रे’पिस्ट की हत्या करके किसी को न्याय कैसे मिल सकता है, जब तक तथ्यों और तर्कों से यह साबित न हो जाये और न्यायपालिका यह फैसला न सुना दे कि फलां कसूरवार है। इसे इस तरह की सजा मिलनी चाहिये।

गांधी की निगाह में एक दोषी का मन से अपने अपराध को स्वीकार करना, पश्चाताप करना और खुद को बदलने की कोशिश करना ही न्याय है। अगर वास्तव में ऐसा हो तो निश्चित तौर पर पीड़ित को भी शांति मिलती होगी। मगर हमारी आधुनिक न्याय व्यवस्था में इन चीजों के लिए जगह कहां। इसलिये वह कानून की धाराओं और अदालती जिरह को मानती है। वह आरोपी को अपनी बात रखने का एक मौका जरूर देती है। क्योंकि हो सकता है किसी विपरीत परिस्थिति में उसने अपराध किया हो, उसे फंसाया जा रहा हो। मगर आरोपी की बात सामने आये बगैर जब उसे ठिकाने लगा दिया जाता है तो कई सवाल उसके साथ दफ़न हो जाते हैं।

इस देश में जब नाथूराम ने गांधी की हत्या की थी, तब भी वहां मौजूद लोगों ने उसकी लिन्चिंग नहीं की। उसे अदालत में अपनी बात रखने की पूरी आज़ादी दी गयी और आज भी उसकी राय पर आधारित किताब पूरे देश में बिकती है। किसी सरकार ने उसे बिकने से नहीं रोका। ऐसे देश में किसी आरोपी को सुने बगैर उसकी हत्या कर देने को कैसे सही माना जा सकता है।

मगर फिर क्या करें, देश की लचर न्यायपालिका के तारीखोंं के भरोसे उसे छोड़ दें। नहीं। मत छोड़िये। न्याय व्यवस्था अपना काम नहीं कर पा रही तो इसका मतलब यह नहीं कि न्याय का सिद्धांत ही गलत है। व्यवस्था की कमियों को ठीक करना हम सबकी जिम्मेदारी है। अगर हम वाकई न्याय चाहते हैं तो वह अदालती कटघड़े में ही होगा। सड़कों पर नहीं। सड़कों पर सिर्फ प्रतिशोध लिया जा सकता है।

और यह भी ध्यान में रखिये कि अपराध के मामलों में न्याय में देरी या न होने के पीछे उस पुलिस व्यवस्था की लचर जांच रिपोर्ट भी बड़ी वजह है, जिसके ए’नकाऊंटर को हम सिंम्बा फिल्म की तरह सेलीब्रेट कर रहे हैं। और पुलिस जांच रिपोर्ट में दो बेगुनाह का नाम डाल देना इस देश में आम बात है।

-PUSHYA MITRA

चलते रहो, चलते रहो,सही दिशा मे चलते रहो....मार्ग मिल ही जाएगा।


*तथागत गौतम बुद्ध कहते है*
*चलते रहो, चलते रहो,सही दिशा मे चलते रहो....मार्ग मिल ही जाएगा।*

*जिंदगी है तो संघर्ष हैं, तनाव है,चिंता है, ख़ुशी है, डर है,सुख है दुख है।लेकिन ये सभी अनित्य है,स्थायी नहीं हैं,परिवर्तनशील है। समयरूपी नदी के प्रवाह में सब प्रवाहमान हैं।हर परिस्थिति जरूर बदलती है।*

इसलिए कोई भी परिस्थिति चाहे ख़ुशी की हो या ग़म, कभी स्थायी नहीं होती, वह समय के अविरल प्रवाह में विलीन हो जाती है।

ऐसा अधिकतर होता है कि जीवन की यात्रा के दौरान हम अपने आप को कई बार दुःख, तनाव, चिंता, डर, हताशा, निराशा,भय, रोग आदि के मकड़जाल में फंसा हुआ पाते हैंऔर हम तात्कालिक परिस्थितियों के इतने वशीभूत हो जाते हैं कि दूर-दूर तक कहीं से भी हमें प्रकाश या आशा की किरण मात्र भी दिखाई नहीं देती। *दूर से चींटी की तरह महसूस होने वाली परेशानी हमारे नजदीक आते-आते हाथी के जैसा रूप धारण कर लेती है।* हम उसकी विशालता और भयावहता के आगे समर्पण कर *परिस्थितियों को अपने ऊपर हावी हो जाने देते हैं* ।यही परिस्थिति हमारे पूरे वजूद को हिला डालती है, हमें हताशा, निराशा के भंवर में उलझा जाती है। हमे एक-एक क्षण पहाड़ सा प्रतीत होता है और हम में से *ज्यादातर लोग आशा की कोई किरण ना देख पाने के कारण हताश निराशहोकर परिस्थिति के आगे अपने हथियार डाल देते हैं।*
इसलिए यदि हम किसी भी अनजान, निर्जन दुख के सूखे रेगिस्तान मे फँस जाएँ तो उससे निकलने का एक ही उपाय है, बस हम चलते रहें,चलते रहे। यदि हम नदी के बीच जाकर अपने हाथ पैर नहीं चलाएँगे तो निश्चित ही डूब जाएंगे।इसलिए जीवन मे कभी ऐसे क्षण भी आते है जब लगता है कि बस अब तो चारों ओर अंधेरा है,अब कुछ भी उम्मीद नहीं है, *तब हमें ऐसी परिस्थिति में अपने आत्मविश्वास और साहस के साथ सिर्फ डटे रह कर मुकाबला करना चाहिए क्योंकि हर समस्या या परिस्थिति का हल होता हैं,आज नहीं तो कल होता हैं ।*

.....बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय
बहुसंख्यक लोगों का, मेजोरिटी का कल्याण हो


रेगर हंसराज की वाल से 

एक सक्षम, पारदर्शी, सुलभ तथा कम खर्चीली न्याय प्रणाली सुशासन की कुंजी है।

देश में इन दिनों यौन हिंसा और अपराध को लेकर काफी गहमागहमी का माहौल है। सोचने की बात है कि आज हमारा समाज ऐसा क्यों बन गया है कि ऐसे जघन्य अपराध होते चले जा रहे हैं और न्याय पाने की लड़ाई इतनी लंबी खिंचती चली जा रही है। एक इंसान की जिंदगी से भी लंबी एक मुकदमे की जिंदगी होती है। एक सक्षम, पारदर्शी, सुलभ तथा कम खर्चीली न्याय प्रणाली सुशासन की कुंजी है।

समय से सभी को न्याय मिले, न्याय व्यवस्था कम खर्चीली हो, सामान्य आदमी की भाषा समझ में निर्णय देने की व्यवस्था हो, और खासकर महिलाओं तथा कमजोर वर्ग के लोगों को न्याय मिले, यह हम सबकी ज़िम्मेदारी है राष्ट्रपति कोविन्द

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि न्याय मिलने में देर, एक तरह का अन्याय है।

न्याय बदले की भावना से प्रेरित नहीं होना चाहिये। न्‍याय कभी भी हो सकता है, तत्‍काल भी होना चाहिये लेकिन यदि यह प्रतिशोध के भाव से भरा है तो ऐसा नहीं होना चाहिये। मेरा ऐसा मानना है कि यदि न्‍याय बदला लेता है तो वह अपने चरित्र को भी खो देता है।

कोई औरत अपने को निर्वस्त्र तभी कर सकती है जब उसे लगे कि उसकी कोई इज्जत नहीं बची है। निजता उसकी इज्जत है। उपन्यासकार ऐन रैंड ने कहा है कि सभ्यता समाज का निजता की ओर विकास है- असभ्यों, जंगलियों की कोई निजता नहीं होती।

कुल मिलाकर, महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा और अन्याय को रोकने के लिए चौतरफा प्रयास की जरूरत है। इसके लिए परिवार और समाज को जागरूक होना होगा, सरकार को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी, पुलिस को मुस्तैद रहना होगा और लड़कियों का आत्मविश्वास बढ़ाना होगा।

एक इंसान की जिंदगी से भी लंबी एक मुकदमे की जिंदगी होती है।

फ्रैंज काफ्का की कहानी 'बिफोर द लॉ' न्याय की गुहार करने वाले एक ऐसे व्यक्ति की व्यथा कथा है, जिसे अदालत के बाहर खड़ा सुरक्षाकर्मी अदालत में प्रवेश करने से रोक देता है। परंतु अन्याय का शिकार पीड़ित परिसर से बाहर नहीं निकलता है और अंदर प्रवेश कर न्याय पाने के लिए वहीं डटा रहता है। अंत में उसकी मौत हो जाती है और वह सुरक्षाकर्मी बुदबुदाता है, 'यह दरवाजा तुम्हारे लिए था।' (यानी न्याय पाने का मृत्यु के सिवाय और कोई रास्ता नहीं है।) पांच-छह पृष्ठों की इस छोटी सी कहानी पर जॉक दरीदा ने 70 पृष्ठों की आलोचना लिखी है, जिसमें उन्होंने सवाल उठाया है कि कानून के समक्ष कौन है- न्याय की गुहार लगा रहा पीड़ित, सुरक्षा प्रहरी या न्यायाधीश। दरअसल, पूरी न्यायिक व्यवस्था इतनी खर्चीली, दुरूह और लंबी खिंचने वाली है कि आम आदमी के लिए न्याय पाना मात्र एक सपना है।

न्याय सभ्यता को बर्बरता से अलग करता है। पॉल टिलिच ने प्यार, सत्ता और न्याय के विश्लेषण में न्याय के मौलिक सम्मान पर ज़ोर देते हुए लिखा है कि ये तीनों उतने ही पुराने हैं, जितने कि इंसान। उनके अनुसार प्यार मूलत: बिछड़ों का मिलन है, जिसमें यह माना जाता है कि जो कभी साथ थे वे अलग हो गए। सत्ता व्यक्ति की व्यक्ति के साथ अंत:क्रिया है, जो प्यार को प्राप्त करने की एक अनिवार्य प्रक्रिया है। और अंत में, न्याय सत्ता का वह स्वरूप है जो प्यार के अस्तित्व को बनाये रखता है। इस तरह प्यार न्याय का अंतिम सिद्धांत है। किंतु न्याय कहीं मिलता नहीं है।


मनोज कुमार रातावाल ने पूरा किया IAS बनने का सपना, समाजसेवी नवरत्न गुसाईवाल ने किया स्वागत


दिल्ली समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2019 में चयनित मनोज कुमार रातावाल को समाजहित एक्सप्रेस के पत्रकार व समाजसेवी नवरत्न गुसाईवाल (पूर्व महासचिव, अखिल भारतीय रैगर महासंघ) ने जयपुर से उनके निवास गाँव श्यामपुरा पालडी पर पहुंच कर फूलो की माला पहनाकर स्वागत कर बधाई एवं शुभकामनाएं दी, साथ में मनोज कुमार के पिताश्री सोहन लाल रातावाल जी को पगड़ी बंधवाकर फूलो की माला पहनाकर रैगर समाज की पुस्तक भेट कर बधाई दी ।


संघ लोक सेवा आयोग ने सरकार द्वारा घोषित कुल 927 रिक्तियों के लिए कुल 829 उम्मीदवारों को नियुक्ति के लिए अनुशंसा की है । जिसमे राजस्थान के श्यामपुरा निवासी मनोज कुमार रातावाल ने ऑल इंडिया रैंकिग में 544वां स्थान हासिल कर अपने परिवार, समाज,गाँव और राज्य का नाम रोशन किया है ।

देश की सबसे प्रतिष्ठित और सबसे कठिन सिविल सेवा परीक्षा 2019 में सफलता हासिल करने वाले मनोज कुमार रातावाल के गाँव श्यामपुरा पालडी में त्यौहार जैसा हर्ष का माहौल है । घर में रिश्तेदारों और मित्रों के पहुंचने का सिलसिला शुरु हुआ और सभी ने मनोज कुमार रातावाल की इस उपलब्धि पर बधाई और शुभकामनाएं दी l


इस अवसर पर जयपुर से समाजहित एक्सप्रेस के पत्रकार व समाजसेवी नवरत्न गुसाईवाल (पूर्व महासचिव, अखिल भारतीय रैगर महासंघ) और रूप नारायण उज्जेनिया गाँव श्यामपुरा पालडी पहुंचकर मनोज कुमार रातावाल और उनके पिता सोहन लाल रातावाल को पगड़ी बंधवाकर फूलो की माला पहनाकर स्वागत कर रैगर समाज की पुस्तक भेट कर उज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी । रैगर समाज के जी०आर० आलोरिया और पी०एन० रछौया ने भी अपने शुभकामना सन्देश में कहा कि रैगर समाज का एक होनहार युवक आईएस के लिए चयनित हुआ है, यह पुरे समाज के लिए गर्व की बात है l

मनोज कुमार रातावाल के पिताश्री सोहन लाल रातावाल ने कहा कि हमें कितनी खुशी मिली है उसको आज हम शब्दों में ब्यान नहीं कर सकते । सीधे सादे परिवार से तालुक रखने वाले हमारे बेटे मनोज ने सिविल सेवा की परीक्षा में सफलता हासिल कर हमारे परिवार का ही नहीं, पूरे समाज का नाम रोशन किया है । अपने बेटे के इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने उसकी पढाई के प्रति लगन, कड़ी मेहनत और अनुशासन की बात कही l

समाजसेवी नवरत्न गुसाईवाल ने कहा कि परमात्मा के आशीर्वाद से, परिवार के सहयोग से और प्रशिक्षको के प्रयास व रैगर समाज के होनहार मनोज रातावाल के कठिन परिश्रम से ही सफलता प्राप्त हुई जिससे रातावाल परिवार व रैगर समाज का नाम रोशन हुआ है । यह पुरे समाज के लिए गर्व की बात है l

समाजहित एक्सप्रेस टीम की ओर से मनोज रातावाल को आईएएस में चयन होने पर बहुत बहुत बधाई साथ ही मंगलकामनायें l हम आपके उज्जवल भविष्य की कामना करते है तथा जीवन में आपको वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, आदर्श, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि प्राप्त हो l


Sunday, August 2, 2020

ट्रैफिक पुलिस नागंलोई बस डिपो की टीम कर्मियों को कोरोना योद्धा सम्मान से सम्मानित किया गया


दिल्ली समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l  दिल्ली, ज्वालापुरी रविवार, 02 अगस्त 2020 को दिल्ली युवा जागृति मंच की ओर से ट्रैफिक पुलिस नागंलोई बस डिपो की टीम को ईमानदारी व लग्न से अपनी ड्यूटी निभाने पर कोरोना योद्धा सम्मान से सम्मानित किया गया।


इस मौके पर मंच के अध्यक्ष भाई सुरेन्द्र बहल ने ट्रैफिक पुलिस जोनल अधिकारी A.S.I सोदान सिंह की टीम को ईमानदारी व लग्न से अपनी ड्यूटी निभाने व यहां लोगों को जाम से छुटकारा दिलाने के लिए। दिल्ली युवा जागृति मंच की ओर से धन्यवाद किया। वही मंच के सदस्यों के साथ सोदान सिंह की टीम का फूल माला व पगड़ी बंधवाकर कोरोना योद्धा का सम्मान से सम्मानित किया। मंच के अध्यक्ष भाई सुरेन्द्र बहल   सलाहकार श्याम लाल बड़सीवाल ने पूरी टीम को पगड़ी बंधवाई। वही मंच के कोषाध्यक्ष राकेश खिंच्ची, उपाध्यक्ष विनोद तोमर, नागंलोई मण्ड़ल अध्यक्ष मुकेश बसवाला, उपाध्यक्ष सज्जन नागर मंच के सदस्य गुलशन, बागड़ी सुरेश तंवर व मंच के अनेक सदस्यगणो ने ट्रैफिक टीम को फूल माला पहनाकर सम्मान किया।


मंगोलपुरी व उधोग नगर के लोगों ने दिल्ली युवा जागृति मंच के सदस्यों को नागंलोई ट्रैफिक टीम के अच्छे कार्यो की जानकारी दी। मंच के सलाहकार श्याम लाल बड़सीवाल ने अनेकों बार मौके पर जाकर, जोनल अधिकारी A.S.I  सोदान सिंह की टीम के कार्यो की सराहना की।


पिछले 2 महिनों से ट्रैफिक पुलिस जोनल अधिकारी A.S.I  सोदान सिंह की टीम ने अच्छा कार्य कर, लोगों को जाम से छुटकारा दिलाया। लोगों ने ट्रैफिक पुलिस A.S.I  सोदान सिंह की टीम के पुलिस कर्मियों H.C राजेश कुमार, H.C कर्मवीर सिंह, H.C राजेश सिंह, कांस्टेबल अनिल व कांस्टेबल सुभाष ने नागंलोई बस डिपो व मंगोलपुरी अण्डर पास जो जाम लगा रहता था, वहा लोगों को जाम से छुटकारा दिलाया। लोगों को लाल बत्ती पार न करने, वाहन को तय गति से तेज न चलाने व ट्रैफिक नियमों की जानकारियाँ देते हैं।


दिनेश लबाना प्रतापगढ़ को उदयपुर संभाग यूथ विंग के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई ।


दिल्ली समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l उदयपुर, प्रतापगढ़ आम आदमी पार्टी राजस्थान उदयपुर संभाग यूथ विंग अध्यक्ष पप्पू लाल कीर द्वारा हाल ही में पार्टी के सक्रिय एवं जमीनी कार्यकर्ता दिनेश लबाना की मेहनत, संघर्ष, जनकल्याण के प्रति काम करने की भावना तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में योगदान को देखते हुए उनको उदयपुर संभाग में यूथ विंग के उपाध्यक्ष पद की बड़ी जिम्मेदारी दी गई । अपनी नव नियुक्ति के अवसर पर दिनेश लबाना ने शीर्ष नेतृत्व और उदयपुर संभाग यूथ विंग अध्यक्ष पप्पू लाल कीर का आभार व्यक्त किया l यूथ विंग के कई पदाधिकारियों ने उनको बधाई दी l


आम आदमी पार्टी राजस्थान उदयपुर संभाग के सक्रिय एवं जमीनी कार्यकर्ता दिनेश लबाना को नई जिम्मेदारी मिलने पर ख़ुशी व्यक्त करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का आभार जिसने मुझे अंतिम पंक्ति में बैठे हुए व्यक्ति को उदयपुर संभाग में यूथ विंग के उपाध्यक्ष पद पर नियुक्त किया। पार्टी ने जो जिम्मेदारी मुझे सौंपी है, उसे मैं पूरी ईमानदारी से निभाऊंगा और पार्टी के संगठन को मजबूत करने का भरसक प्रयास करूंगा।

इस दौरान दिनेश लबाना ने युवाओं से समाज हित के कार्यों में लगने का आह्वान किया और कहा कि मैं हमेशा जनता के हक के लिए लड़ता रहूंगा। क्षेत्र के कार्यकर्ताओ में ख़ुशी का माहौल है l

दिल्ली में केजरीवाल सरकार द्वारा वेट दर 30% से घटा कर 16.75 प्रतिशत कर डीजल 8.36 रूपए सस्ता कर राज्य के आर्थिक विकास हेतु सार्थक प्रयास किया है, जिसके लिए उदयपुर संभाग के सभी कार्यकर्ताओ ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी का आभार व्यक्त किया ।